हफ्ते के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई, जहां BSE Sensex करीब 450 अंक गिरकर 73,850 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, वहीं Nifty 50 भी लगभग 100 अंकों की गिरावट के साथ 22,600 पर आ गया। बाजार में यह दबाव खासतौर पर ऑयल एंड गैस और फार्मा सेक्टर में बिकवाली के चलते देखने को मिला, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
हालांकि, सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 21 में बढ़त भी दर्ज की गई, लेकिन कुछ बड़े शेयरों में आई गिरावट ने पूरे इंडेक्स को नीचे खींच लिया। यह संकेत देता है कि बाजार में फिलहाल अस्थिरता बनी हुई है और सेक्टर-विशेष दबाव का असर व्यापक रूप से दिख रहा है।
वैश्विक संकेतों की बात करें तो एशियाई बाजारों में हल्की मजबूती देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं, जबकि हांगकांग और चीन के बाजार बंद रहे। वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछला कारोबारी सत्र मिला-जुला रहा, जिससे निवेशकों को स्पष्ट दिशा नहीं मिल पाई।
इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी बाजार पर दबाव का एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। क्रूड ऑयल करीब 0.48% बढ़कर 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर साफ दिख रहा है, जिसका सीधा प्रभाव इक्विटी मार्केट पर भी पड़ रहा है।
निवेशकों की नजर अब Reserve Bank of India की मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी हुई है, जो आज से शुरू हो गई है। इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर बड़े फैसले की उम्मीद तो नहीं है, लेकिन महंगाई और आर्थिक आउटलुक पर दिए जाने वाले संकेत बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। 8 अप्रैल को आरबीआई गवर्नर इस बैठक के फैसलों की घोषणा करेंगे।
टेक्निकल नजरिए से देखा जाए तो निफ्टी फिलहाल अहम सपोर्ट जोन के करीब पहुंच रहा है, जहां 21,930 और 21,750 के स्तर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। वहीं ऊपर की ओर 23,000 से 23,500 का दायरा मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। सेंसेक्स के लिए 73,800–74,000 का स्तर तत्काल बाधा है, जबकि नीचे की ओर 72,000 टूटने पर और गिरावट देखने को मिल सकती है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस हफ्ते बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है और ग्लोबल फैक्टर्स—खासकर मध्य-पूर्व के हालात, विदेशी निवेश और करेंसी मूवमेंट—निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेंगे। ऐसे में सलाह दी जा रही है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रहें और मजबूत फंडामेंटल वाले लार्ज-कैप शेयरों पर ही फोकस करें।
कुल मिलाकर, बाजार में फिलहाल अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जहां हर छोटी-बड़ी वैश्विक खबर का असर सीधे निवेशकों की रणनीति पर पड़ता नजर आ रहा है।