इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व कमिश्नर Lalit Modi ने मौजूदा आईपीएल फॉर्मेट को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि वर्तमान ढांचे की वजह से Board of Control for Cricket in India और फ्रेंचाइजी को मिलाकर करीब 2400 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब लीग का विस्तार और व्यावसायिक मॉडल लगातार चर्चा में है।
मोदी के मुताबिक, आईपीएल की असली ताकत उसके “होम एंड अवे” फॉर्मेट में थी, जहां हर टीम अपने घरेलू और विरोधी टीम के मैदान पर मुकाबला खेलती थी। यही मॉडल फ्रेंचाइजी को बेचा गया था और इसी आधार पर उन्होंने निवेश किया। लेकिन मौजूदा सीजन में यह पूरी तरह लागू नहीं हो पा रहा, जिससे कम मैच हो रहे हैं और सीधा असर कमाई पर पड़ रहा है।
उन्होंने समझाया कि हर मैच से होने वाली कमाई का 50 फीसदी हिस्सा बीसीसीआई को जाता है, जबकि बाकी 50 फीसदी टीमों में बांटा जाता है। ऐसे में जब मैचों की संख्या घटती है, तो फ्रेंचाइजी की आय भी कम हो जाती है। उनके अनुसार, अगर पुराना मॉडल जारी रहता, तो लीग में 90 मुकाबले होते और प्लेऑफ सहित कुल 94 मैच खेले जाते। लेकिन अभी केवल 70 लीग मैच और 4 प्लेऑफ मुकाबले ही हो रहे हैं, यानी करीब 20 मैच कम हो गए हैं।
मोदी का कहना है कि हर मैच से औसतन 118 करोड़ रुपये की कमाई होती है। इस हिसाब से अगर पूरे 94 मैच खेले जाते, तो करीब 2400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती थी। इसमें से लगभग 1200 करोड़ रुपये फ्रेंचाइजी को मिलते, यानी हर टीम को करीब 120 करोड़ रुपये का फायदा होता। इससे टीमों की वैल्यू भी और मजबूत होती।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीमों की संख्या बढ़ाने से पहले कैलेंडर और फॉर्मेट को संतुलित करना जरूरी था। अगर शेड्यूल में जगह नहीं थी, तो टीमों की संख्या 10 तक नहीं बढ़ानी चाहिए थी। यह सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक बड़ा बिजनेस मॉडल है, और इसमें किए गए बदलावों का सीधा असर आर्थिक ढांचे पर पड़ता है।
गौरतलब है कि 2022 में दो नई टीमों के जुड़ने के बाद आईपीएल का फॉर्मेट बदला गया, जिससे मैचों की संख्या और संरचना दोनों प्रभावित हुईं। मोदी के इस बयान ने एक बार फिर लीग के मौजूदा मॉडल, फ्रेंचाइजी हितों और भविष्य की दिशा पर बहस छेड़ दी है।