राजधानी रायपुर में एक बार फिर साइबर ठगों ने चालाकी से बड़ा खेल कर दिया। इस बार निशाना बने एक कारोबारी, जिन्हें बिजली मीटर लगाने के नाम पर झांसा देकर 7 लाख से ज्यादा की रकम उड़ा ली गई। मामला देवेंद्र नगर थाना क्षेत्र का है, जहां ठग ने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताकर पूरी साजिश को अंजाम दिया।
पीड़ित आशीष भाई देसाई, जो सेक्टर-2 में किराए से रहते हैं और लेमिनेट का काम करते हैं, उन्होंने 1 अप्रैल 2026 को नया बिजली मीटर लगाने के लिए आवेदन किया था। इसी बीच 4 अप्रैल की सुबह उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया, जिसने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताया। यहीं से ठगी की पूरी स्क्रिप्ट शुरू हुई।
ठग ने बेहद भरोसेमंद अंदाज में कहा कि मीटर लगाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए केवल 13 रुपये का ऑनलाइन भुगतान करना होगा। इसके बाद उसने व्हाट्सएप कॉल के जरिए एक लिंक भेजा, जिसमें बिजली विभाग का लोगो भी लगा था, जिससे यह पूरी तरह असली प्रतीत हो रहा था। भरोसे में आकर जैसे ही पीड़ित ने लिंक पर क्लिक किया, उनका मोबाइल पूरी तरह हैक हो गया।
इसके बाद ठग ने बिना समय गंवाए बैंक खातों को निशाना बनाया। बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खाते से 6 अलग-अलग ट्रांजैक्शन में 6,03,472 रुपये निकाल लिए गए, जबकि एचडीएफसी बैंक के खाते से 99 हजार रुपये और उड़ा लिए गए। कुल मिलाकर 8 ट्रांजैक्शन के जरिए 7,02,472 रुपये की ठगी कर ली गई।
जब लगातार खाते से पैसे कटने के मैसेज आने लगे, तब पीड़ित को शक हुआ और उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर ठगों की तलाश की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब बेहद प्रोफेशनल तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं। छोटे से अमाउंट—जैसे 13 रुपये—का लालच देकर वे लोगों को जाल में फंसाते हैं और फिर पूरा बैंक अकाउंट खाली कर देते हैं।
पुलिस ने इस मामले के बाद लोगों से खास अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और फोन पर मांगी गई निजी या बैंकिंग जानकारी बिल्कुल साझा न करें। सरकारी विभाग कभी भी इस तरह लिंक भेजकर भुगतान नहीं करवाते। सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुई ठगी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि डिजिटल दुनिया में जरा सी लापरवाही भारी नुकसान में बदल सकती है।