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वैश्विक संकेतों के बीच संभलकर बढ़ेगा बाजार, निवेशकों की नजर हर मोड़ पर

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वैश्विक बाजारों से मिल रहे मिले-जुले लेकिन स्थिर संकेतों के बीच आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत शांत और सीमित दायरे में होने के संकेत मिल रहे हैं। निवेशकों के बीच फिलहाल उत्साह और सतर्कता का मिश्रण साफ दिखाई दे रहा है। गिफ्ट निफ्टी में हल्की तेजी ने बाजार को शुरुआती सहारा जरूर दिया है, लेकिन पिछले कारोबारी सत्र में आई गिरावट अभी भी निवेशकों के मन में बनी हुई है, जिससे वे कोई बड़ा दांव लगाने से बचते नजर आ रहे हैं।

शुक्रवार सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 63 अंकों की बढ़त के साथ 23,946 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जो यह इशारा देता है कि बाजार हल्की मजबूती के साथ खुल सकता है। हालांकि, गुरुवार को घरेलू बाजार में आई भारी गिरावट ने माहौल को थोड़ा ठंडा कर दिया है। निफ्टी 50 करीब 222 अंकों की गिरावट के साथ 23,775 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 931 अंकों तक टूटकर 76,632 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट ने साफ कर दिया कि बाजार अभी भी वैश्विक घटनाक्रमों के प्रभाव में है और छोटी-सी खबर भी बड़ा उतार-चढ़ाव ला सकती है।

एशियाई बाजारों की बात करें तो वहां से आज सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 1.65% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जबकि दक्षिण कोरिया के कोस्पी और कोसडैक इंडेक्स में भी क्रमशः 1.68% और 1.14% की तेजी दर्ज की गई है। हांगकांग के हैंगसेंग फ्यूचर्स में भी हल्की मजबूती देखने को मिली है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो हफ्तों के युद्धविराम को लेकर बाजार में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। यह समझौता कितना टिकाऊ रहेगा, इस पर निवेशकों की पैनी नजर है।

अमेरिकी बाजारों से जरूर एक बड़ा सकारात्मक संकेत मिला है। गुरुवार को वहां जोरदार तेजी देखने को मिली। डाउ जोन्स इंडेक्स 1,325 अंकों की छलांग लगाकर 47,909 पर बंद हुआ, जबकि S&P 500 और नैस्डैक कंपोजिट में भी क्रमशः 2.51% और 2.80% की मजबूत बढ़त दर्ज की गई। इस तेजी के पीछे अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले को फिलहाल टालने का फैसला प्रमुख कारण माना जा रहा है, जिससे निवेशकों में भरोसा लौटा है। हालांकि, यह राहत अस्थायी भी साबित हो सकती है, क्योंकि आगे की स्थिति पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर करेगी।

दूसरी ओर, अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आ रहे संकेत थोड़े चिंताजनक हैं। चौथी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ घटकर 0.5% रह गई है, जो इससे पहले की तिमाही के 4.4% के मुकाबले काफी कमजोर है। इतनी तेजी से आई गिरावट यह संकेत देती है कि आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ रही है। इसका असर वैश्विक निवेशकों के रुख पर पड़ सकता है और उभरते बाजारों, जैसे भारत, में भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

कमोडिटी बाजार में भी हलचल जारी है। कच्चे तेल की कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जहां डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 98.45 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड लगभग 96.64 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं घरेलू बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। 24 कैरेट सोना 1,53,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि चांदी 1.55% चढ़कर 2.44 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमतों में हल्की नरमी देखी गई है।

संस्थागत निवेशकों के रुख पर नजर डालें तो विदेशी निवेशक अभी भी सतर्क बने हुए हैं। 9 अप्रैल को एफआईआई ने करीब 1,830 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे बाजार पर दबाव बना। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,204 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ हद तक संभाला। यही कारण है कि भारी गिरावट के बावजूद बाजार पूरी तरह टूटने से बच गया।

कुल मिलाकर, भारतीय शेयर बाजार इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां हर वैश्विक संकेत उसका रुख तय कर रहा है। निवेशक फिलहाल तेजी के संकेतों को लेकर उत्साहित जरूर हैं, लेकिन अनिश्चितता के कारण पूरी तरह भरोसे के साथ आगे बढ़ने से बच रहे हैं। आने वाले समय में भू-राजनीतिक घटनाएं, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां ही बाजार की दिशा तय करेंगी।

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