छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने बिलासपुर दौरे के दौरान भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कई बड़े आरोप लगाए। उन्होंने साफ कहा कि प्रदेश में ऐसा कोई विभाग नहीं बचा है, जहां भ्रष्टाचार न हो रहा हो, और जांच की मांग करने वालों पर ही कार्रवाई की जा रही है।
बघेल ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन और कृषि विभाग जैसे अहम विभागों में अनियमितताएं चरम पर हैं। उनका कहना था कि कुछ मामलों में पहले वर्क ऑर्डर जारी कर दिए जाते हैं और बाद में टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाती है, जो पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। कृषि विभाग पर भी उन्होंने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकताएं बदल गई हैं और गलत गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अपने दौरे के दौरान वह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष Dharamlal Kaushik के भाई के निधन पर शोक व्यक्त करने पहुंचे थे, लेकिन इस मौके पर उन्होंने प्रदेश की मौजूदा स्थिति को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में लोग पानी के लिए परेशान हैं, जबकि दूसरी ओर शराब की खुलेआम बिक्री हो रही है, जिससे सामाजिक हालात बिगड़ रहे हैं।
नक्सलवाद के मुद्दे पर भी बघेल ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में नक्सलवाद के खत्म होने का दावा कर रही है, तो उसे अपनी बात साबित करनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने चुनौती दी कि मंत्री और विधायक अपनी Z+ सुरक्षा छोड़ें और बस्तर से सुरक्षा बलों के कैंप हटाए जाएं। उनका कहना था कि जब तक बस्तर में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बनी रहेगी, तब तक नक्सलवाद समाप्त होने का दावा अधूरा माना जाएगा।
धर्म स्वतंत्रता कानून को लेकर भी उन्होंने सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया। बघेल ने कहा कि उनके शासनकाल में जबरिया धर्मांतरण के मामलों में कार्रवाई की गई थी और अब सिर्फ सजा बढ़ाकर इसे बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है, जबकि मामला अभी अदालत में लंबित है।
इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान समय में विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है। सवाल उठाने वालों पर केस दर्ज किए जा रहे हैं और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सवाल पूछने पर नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
कुल मिलाकर, भूपेश बघेल का यह बयान प्रदेश की राजनीति में नए विवाद और बहस को जन्म दे चुका है। जहां एक ओर उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर नक्सलवाद और सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर खुली चुनौती भी दे दी है।