स्मार्टफोन यूजर्स के लिए सबसे बड़ी परेशानी हमेशा बैटरी रही है। दिन में एक-दो बार फोन चार्ज करना अब आम बात बन चुकी है, लेकिन अब यह आदत बदलने वाली है। मोबाइल इंडस्ट्री में एक नई तकनीक तेजी से उभर रही है, जिसे सिलिकॉन-कार्बन बैटरी कहा जा रहा है। यह टेक्नोलॉजी बिना फोन का साइज बढ़ाए ज्यादा पावर देने का वादा करती है और आने वाले समय में स्मार्टफोन इस्तेमाल का पूरा अनुभव बदल सकती है।
अब तक ज्यादातर फोन में लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल होता था, जिसमें ग्रेफाइट के जरिए ऊर्जा स्टोर की जाती है। लेकिन सिलिकॉन-कार्बन बैटरी में ग्रेफाइट की जगह सिलिकॉन का उपयोग किया जाता है। यही सबसे बड़ा बदलाव है, क्योंकि सिलिकॉन ज्यादा मात्रा में लिथियम आयन स्टोर कर सकता है। इसका सीधा मतलब है कि छोटे से फोन में भी बड़ी बैटरी फिट हो सकती है और बैकअप कई गुना बढ़ सकता है।
इस नई तकनीक को अपनाने की दौड़ में OnePlus और Oppo जैसे ब्रांड सबसे आगे नजर आ रहे हैं। हाल ही में OnePlus Nord 6 में 9000mAh जैसी बड़ी बैटरी की चर्चा हो रही है, जो अब तक के स्मार्टफोन ट्रेंड को पूरी तरह बदल सकती है। वहीं Samsung भी इस टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम कर रहा है और आने वाले डिवाइस में इसे लाने की तैयारी कर रहा है।
इस टेक्नोलॉजी के फायदे सिर्फ बैटरी तक सीमित नहीं हैं। कंपनियों के पास अब दो विकल्प होंगे—या तो ज्यादा बैटरी देकर फोन का बैकअप बढ़ाया जाए या फिर उसी बैटरी में फोन को और पतला और हल्का बनाया जाए। साथ ही यह बैटरी अलग-अलग मौसम में भी बेहतर परफॉर्म करती है, यानी ज्यादा गर्मी या ठंड का असर कम देखने को मिलेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple और Google भी इस तकनीक पर नजर बनाए हुए हैं, हालांकि फिलहाल उन्होंने इसे बड़े स्तर पर अपनाने का फैसला नहीं किया है। लेकिन जिस तेजी से यह टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है, उससे साफ है कि आने वाले सालों में यह स्मार्टफोन की दुनिया में नया स्टैंडर्ड बन सकती है।
कुल मिलाकर, सिलिकॉन-कार्बन बैटरी स्मार्टफोन यूजर्स के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकती है। अब फोन सिर्फ स्मार्ट ही नहीं, बल्कि ज्यादा पावरफुल और लंबे समय तक चलने वाले भी होंगे।