भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में एक नया सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। Ayush Shetty ने एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचकर वो कर दिखाया, जिसका इंतजार देश पिछले 60 वर्षों से कर रहा था। इतने लंबे समय बाद कोई भारतीय खिलाड़ी मेंस सिंगल्स के फाइनल तक पहुंचा है, जिससे खेल जगत में उत्साह की लहर दौड़ गई है।
सिर्फ 20 साल की उम्र में आयुष ने अपने शानदार खेल और जबरदस्त जज्बे से यह मुकाम हासिल किया। सेमीफाइनल में उन्होंने डिफेंडिंग चैंपियन Kunlavut Vitidsarn को कड़े मुकाबले में हराया। पहला गेम हारने के बाद जिस तरह उन्होंने वापसी की, वह उनकी मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास का बड़ा उदाहरण बन गया। उन्होंने मुकाबला 10-21, 21-19, 21-17 से जीतकर फाइनल का टिकट हासिल किया।
इस उपलब्धि की खास बात यह है कि इससे पहले Dinesh Khanna ने 1965 में मेंस सिंगल्स में भारत के लिए खिताब जीता था। उसके बाद से भारत इस कैटेगरी में फाइनल तक भी नहीं पहुंच पाया था। ऐसे में आयुष की यह सफलता सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि भारतीय बैडमिंटन के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।
फाइनल तक पहुंचने का सफर भी आसान नहीं रहा। आयुष ने क्वार्टर फाइनल में वर्ल्ड नंबर-4 जोनाथन क्रिस्टी को हराकर बड़ा उलटफेर किया। इससे पहले भी उन्होंने कई मजबूत खिलाड़ियों को मात देकर यह साबित किया कि वह सिर्फ उभरते सितारे नहीं, बल्कि बड़े मंच के खिलाड़ी बन चुके हैं।
अब पूरे देश की नजर फाइनल मुकाबले पर टिकी है, जहां आयुष इतिहास रचने के एक कदम और करीब हैं। अगर वह यह खिताब जीत लेते हैं, तो भारतीय बैडमिंटन को एक नया सुपरस्टार मिल जाएगा।