वैश्विक तनाव का असर अब सीधे भारतीय बाजार पर दिखने लगा है। United States और Iran के बीच शांति वार्ता विफल होते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिसका सीधा असर BSE Sensex और Nifty 50 पर देखने को मिला। हफ्ते की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई, जहां सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 1600 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 23,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया।
हालांकि कारोबार के दौरान बाजार ने कुछ रिकवरी जरूर दिखाई, लेकिन दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। सेंसेक्स करीब 1037 अंकों की गिरावट के साथ 76,512 के आसपास ट्रेड करता नजर आया, वहीं निफ्टी भी 319 अंकों की कमजोरी के साथ 23,731 के स्तर पर बना रहा। यह संकेत है कि बाजार अभी भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
इस गिरावट की जड़ में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव है। Brent Crude 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि WTI Crude Oil भी 104 डॉलर के पार निकल गया। तेल की कीमतों में इस उछाल ने महंगाई और लागत बढ़ने की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।
स्थिति और गंभीर तब हो गई जब Strait of Hormuz को लेकर आशंकाएं बढ़ने लगीं। यह मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल व्यापार होता है। इस रूट पर संभावित बाधा का मतलब है सप्लाई चेन पर असर और कीमतों में और तेजी, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय बन जाता है।
वैश्विक बाजारों में भी ‘रिस्क-ऑफ’ मूड साफ नजर आ रहा है। एशियाई बाजारों में गिरावट, अमेरिकी फ्यूचर्स में कमजोरी और जोखिम वाली मुद्राओं में दबाव इस बात का संकेत है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। इसका असर भारतीय बाजार में भी दिख रहा है, जहां बिकवाली का दबाव बढ़ा हुआ है।
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली थी, लेकिन मौजूदा हालात उस तेजी पर ब्रेक लगाते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो महंगाई, रुपये की कमजोरी और आर्थिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
भारत के लिए यह स्थिति इसलिए और संवेदनशील है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ी सी भी हलचल घरेलू अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकती है।
कुल मिलाकर, बाजार फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम के दबाव में है और आने वाले दिनों में दिशा पूरी तरह तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान संबंधों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को इस समय सतर्क रहने, जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और बाजार की चाल पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है।