नई दिल्ली में महिला सशक्तिकरण को लेकर एक अहम राजनीतिक संदेश सामने आया है। भारत की पहली महिला राष्ट्रपति Pratibha Patil ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने इस कानून को भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने वाला एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम बताया है।
अपने पत्र में प्रतिभा पाटिल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह संवैधानिक संशोधन देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई दिशा देगा। उनके अनुसार, विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना न सिर्फ समानता की दिशा में कदम है, बल्कि लोकतंत्र को और अधिक प्रतिनिधिक और मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने हमेशा महिलाओं को समान अवसर देने और उनके सशक्तिकरण की वकालत की है। ऐसे में यह कानून उनके लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह लंबे समय से चली आ रही मांग को साकार करता है।
इधर केंद्र सरकार भी इस कानून को जल्द लागू करने के लिए सक्रिय नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों के नेताओं से सहयोग की अपील की है, ताकि संसद के आगामी सत्र में इस कानून से जुड़े जरूरी संवैधानिक बदलावों को आगे बढ़ाया जा सके।
राजनीतिक स्तर पर भी इसकी गंभीरता साफ दिखाई दे रही है। Bharatiya Janata Party ने अपने सांसदों के लिए ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी किया है, जिसमें 16 से 18 अप्रैल तक संसद में अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इन दिनों के दौरान इस कानून को लागू करने से जुड़े महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।
दरअसल, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को सितंबर 2023 में संसद से मंजूरी मिली थी। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। इसे भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में सशक्त बनाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, यह पहल सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को बराबरी का हक देने की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है, जो आने वाले समय में भारतीय लोकतंत्र की तस्वीर बदल सकता है।