छत्तीसगढ़ के Raigarh में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने एक बड़े ह्यूमन ट्रैफेकिंग गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में 17 वर्षीय नाबालिग बच्ची को सुरक्षित छुड़ाया गया, जिसे नौकरी के झांसे में फंसाकर पहले बेचा गया और फिर कई तरह की यातनाएं दी गईं।
पीड़िता ने 11 अप्रैल को शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि पारिवारिक तनाव के चलते वह घर से बाहर थी। इसी दौरान उसकी एक परिचित लड़की उसे नौकरी दिलाने के नाम पर रायगढ़ ले आई। यहां गिरोह के सदस्यों ने उसे अपने जाल में फंसाकर मध्यप्रदेश के सागर तक पहुंचा दिया।
सागर जिले के एक गांव में आरोपी सुनील ने करीब डेढ़ लाख रुपये में नाबालिग को खरीद लिया। इसके बाद मंदिर में जबरन शादी कराई गई और शादी के बाद उसके साथ लगातार शारीरिक शोषण किया गया। किसी तरह मौका पाकर पीड़िता वहां से भाग निकली और ट्रेन के जरिए वापस रायगढ़ पहुंची।
लेकिन यह दर्द यहीं खत्म नहीं हुआ। घर लौटने के डर से वह गिरोह के संपर्क में ही रही, जहां महिला आरोपी बिंदिया ने उसे अपने पास रखकर देह व्यापार में धकेल दिया। उसे ग्राहकों के पास भेजा जाता और उसके जरिए पैसे कमाए जाते रहे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। एक बालिका को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। छापेमारी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि मुख्य खरीददार की तलाश में टीम मध्यप्रदेश भेजी गई।
Chhatarpur में दबिश देकर आरोपी सुनील दीक्षित को गिरफ्तार किया गया, जिसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इस मामले में पुलिस ने बीएनएस और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
एसएसपी Shashi Mohan Singh ने साफ कहा है कि मानव तस्करी और देह व्यापार जैसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि ऐसे गिरोह आज भी सक्रिय हैं। पुलिस की तेजी से एक मासूम की जान तो बच गई, लेकिन जरूरत है कि समाज भी जागरूक रहे और ऐसे अपराधों के खिलाफ एकजुट