छत्तीसगढ़ इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है और हालात ऐसे बन चुके हैं कि मानो सूरज सीधे जमीन पर उतर आया हो। प्रदेश के कई जिलों में तापमान ने 40 डिग्री सेल्सियस का आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं राजनांदगांव में पारा 43.5°C तक पहुंचकर इस सीजन का नया रिकॉर्ड बना चुका है। राजधानी रायपुर भी 43°C के साथ झुलसती नजर आई, जबकि माना, बिलासपुर और जगदलपुर जैसे शहर भी तेज गर्म हवाओं की चपेट में रहे। इस बढ़ती तपन ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है और लोग जरूरी कामों के अलावा घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी ने हालात की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है। विभाग ने साफ कहा है कि दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक का समय सबसे खतरनाक है, जब लू अपने चरम पर होती है। इस दौरान बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। यदि किसी कारणवश बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर और शरीर को पूरी तरह ढककर निकलने और लगातार पानी, नींबू पानी, छाछ या ORS जैसे तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी गई है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि वे गर्मी के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
इस भीषण गर्मी के पीछे मौसम विज्ञानियों ने एक विशेष कारण भी बताया है। उत्तरी-पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर बने ऊपरी हवा के चक्रवाती प्रभाव और द्रोणिका प्रणाली ने छत्तीसगढ़ में गर्मी को और ज्यादा तीव्र बना दिया है। इसका असर यह हुआ कि तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और लू की स्थिति और भी खतरनाक हो गई है।
गर्मी का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 20 अप्रैल से ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया गया है। इससे पहले के दिनों में बच्चों को तेज गर्मी के बीच स्कूल जाना पड़ा, जहां कई जगह पंखों से भी गर्म हवा ही मिल रही थी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां सामने आईं। अब अवकाश की घोषणा से छात्रों और अभिभावकों को कुछ राहत जरूर मिलेगी।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में इस समय गर्मी ने अपने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए लोगों की दिनचर्या बदल दी है। प्रशासन और मौसम विभाग लगातार सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं, लेकिन हालात बता रहे हैं कि आने वाले दिनों में भी राहत मिलने की उम्मीद कम ही है। ऐसे में जरूरी है कि लोग सावधानी बरतें और खुद को इस खतरनाक हीटवेव से सुरक्षित रखें।