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गोल्ड सेविंग स्कीम का सच—निवेश नहीं, सिर्फ ज्वेलरी खरीद का स्मार्ट तरीका

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आजकल सोना खरीदने के लिए ज्वेलर्स द्वारा चलाई जा रही गोल्ड सेविंग स्कीम तेजी से लोकप्रिय हो रही है। हर महीने एक तय रकम जमा करने का आसान तरीका लोगों को आकर्षित करता है, खासकर उन लोगों को जो शादी, त्योहार या किसी खास मौके के लिए पहले से प्लानिंग करना चाहते हैं। पहली नजर में यह स्कीम काफी फायदे वाली लगती है, लेकिन अगर इसकी शर्तों को ठीक से न समझा जाए, तो बाद में निराशा भी हाथ लग सकती है।

दरअसल, इस स्कीम की सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि लोग सोचते हैं कि उन्होंने सोने की कीमत पहले ही लॉक कर ली है। जबकि सच्चाई यह है कि इसमें आप सोना नहीं खरीद रहे होते, बल्कि सिर्फ पैसे जमा कर रहे होते हैं। जब आप स्कीम पूरी होने के बाद ज्वेलरी खरीदते हैं, तब उस दिन की कीमत के हिसाब से सोना मिलता है। यानी अगर इस दौरान सोने के दाम बढ़ जाते हैं, तो आपको महंगा सोना ही लेना पड़ेगा।

इन स्कीम्स का एक और आकर्षक हिस्सा होता है बोनस या मेकिंग चार्ज में छूट। आमतौर पर 10 या 11 महीने तक किस्त जमा करने के बाद ज्वेलर एक महीने की किस्त के बराबर फायदा देता है या मेकिंग चार्ज कम कर देता है। लेकिन यहां भी एक ट्विस्ट होता है। यह छूट हर डिजाइन पर लागू नहीं होती और कई बार सिर्फ चुनिंदा ज्वेलरी या एक तय सीमा तक ही मिलती है। अगर आप अलग डिजाइन चुनते हैं, तो मेकिंग चार्ज ज्यादा देना पड़ सकता है।

इसके अलावा, इन स्कीम्स में लचीलापन भी सीमित होता है। अगर आप किसी महीने किस्त भरना भूल जाते हैं या स्कीम पूरी नहीं कर पाते, तो आपको बोनस का लाभ नहीं मिलेगा। कई मामलों में अगर आप अंत में ज्वेलरी खरीदने का फैसला नहीं करते, तो आपको कोई अतिरिक्त फायदा भी नहीं मिलता। इसलिए स्कीम में शामिल होने से पहले सभी नियम और शर्तों को समझना बेहद जरूरी है।

हालांकि, इसका यह मतलब नहीं कि यह स्कीम बेकार है। अगर आप पहले से तय कर चुके हैं कि आपको किसी खास मौके पर ज्वेलरी खरीदनी है, तो यह एक अनुशासित सेविंग तरीका बन सकता है। यह आपको धीरे-धीरे पैसा जोड़ने में मदद करता है और अंत में खरीदारी आसान हो जाती है।

लेकिन अगर आप इसे निवेश समझकर जुड़ रहे हैं, तो यह आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरेगा। गोल्ड सेविंग स्कीम का असली फायदा तभी है, जब आप इसे सिर्फ ज्वेलरी खरीद के लिए इस्तेमाल करें, न कि कीमत लॉक करने या निवेश के तौर पर।

कुल मिलाकर, सही जानकारी और स्पष्ट उद्देश्य के साथ ही इस स्कीम में शामिल होना समझदारी है, वरना फायदे की जगह नुकसान का एहसास भी हो सकता है।

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