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Shreyas Iyer: श्रेयस अय्यर कैसे बने पंजाब किंग्स के ‘सरपंच’, निकनेम के पीछे क्या है कहानी खुद बताया

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आईपीएल में खिलाड़ियों के अलग-अलग निकनेम अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस सीजन पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर का सरपंच नाम काफी पॉपुलर है। अब खुद अय्यर ने इस नाम के पीछे की कहानी बताई और कहा है कि उन्हें यह निकनेम बहुत पसंद है।

जियोस्टार पर बातचीत के दौरान अय्यर ने खुलासा किया कि जब वह पहली बार पंजाब किंग्स से जुड़े थे, तब उन्हें ‘सरपंच’ कहे जाने का मतलब समझ नहीं आता था। उन्होंने कहा, ‘शुरुआत में मुझे बिल्कुल समझ नहीं आया कि मुझे सरपंच क्यों कहा जा रहा। लेकिन जब मैंने अपने साथियों से पूछा, तो उन्होंने बताया कि सरपंच का मतलब होता है किसी परिवार, समूह या इलाके का मुखिया। इसके बाद मुझे यह नाम समझ में आया और फिर मेरी असली यात्रा शुरू हुई।’

श्रेयस को कैसे मिला सरपंच नाम
उत्तर भारत में ‘सरपंच’ शब्द का इस्तेमाल गांव या समुदाय के नेता के लिए किया जाता। यही वजह है कि यह नाम अय्यर की कप्तानी और उनके व्यक्तित्व के साथ अच्छी तरह फिट बैठता। पंजाब किंग्स की टीम के भीतर भी यह नाम तेजी से लोकप्रिय हुआ और अब यह सिर्फ मजाक या बातचीत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि टीम की पहचान का हिस्सा बन गया है।

फ्रेंचाइजी भी क्यों इसका करती इस्तेमाल
फ्रेंचाइजी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी ‘सरपंच साहब’ का टैग लगातार इस्तेमाल हो रहा। इसके अलावा ब्रॉडकास्ट प्रमोशन में भी इसी नाम को आगे बढ़ाया गया। यानी अब यह साफ हो चुका है कि यह निकनेम सिर्फ एक उपनाम नहीं, बल्कि अय्यर की लीडरशिप इमेज का हिस्सा बन चुका।

इस निकनेम से श्रेयस की इमेज मजबूत हुई
अय्यर का कहना है कि यह नाम जिम्मेदारी का एहसास भी कराता है। सरपंच शब्द में अधिकार, भरोसा और अपनापन तीनों झलकते हैं। आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में जहां कप्तान को हर मैच में अपने फैसलों और नेतृत्व के लिए परखा जाता है, वहां इस तरह का नाम उनकी छवि को और मजबूत करता है।

पंजाब किंग्स के प्रदर्शन ने भी इस पहचान को और मजबूत किया है। टीम ने आईपीएल 2025 में फाइनल तक का सफर तय किया था और इस सीजन भी अच्छी शुरुआत की है। जब किसी खिलाड़ी का प्रदर्शन और उसकी छवि एक साथ आगे बढ़ती है, तो उसका निकनेम भी उसकी पहचान बन जाता है। फिलहाल सरपंच निकनेम श्रेयस अय्यर के लिए बिल्कुल यही काम कर रहा। कुल मिलाकर, सरपंच अब सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि अय्यर की कप्तानी और उनकी पहचान का प्रतीक बन चुका है, जिसे वह खुद भी पूरी तरह अपना चुके हैं।

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