अमेरिकी राजनीति और फाइनेंशियल मार्केट के बीच एक खतरनाक कनेक्शन सामने आता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान बार-बार एक ऐसा पैटर्न सामने आया है, जिसने बाजार की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़े राजनीतिक ऐलानों से ठीक पहले कुछ चुनिंदा ट्रेडर्स द्वारा लगाए गए दांव और उसके बाद हुई भारी कमाई अब इनसाइडर ट्रेडिंग की आशंका को मजबूत कर रही है।
BBC की एक विस्तृत पड़ताल में यह सामने आया कि कई अहम मौकों पर ट्रम्प के बयान आने से कुछ मिनट या घंटे पहले ही बाजार में असामान्य हलचल शुरू हो जाती थी। ट्रेडिंग वॉल्यूम अचानक बढ़ जाता, बड़े दांव लगाए जाते और फिर जैसे ही ऐलान होता—उन दांवों पर बैठे लोगों को करोड़ों का मुनाफा मिल जाता।
विशेषज्ञों के बीच इसको लेकर दो धाराएं बन गई हैं। कुछ इसे साफ तौर पर इनसाइडर ट्रेडिंग मान रहे हैं—यानी गोपनीय जानकारी पहले ही कुछ लोगों तक पहुंच रही थी। वहीं कुछ का कहना है कि कुछ अनुभवी ट्रेडर्स ट्रम्प की राजनीतिक चालों और फैसलों को पहले से भांपने में माहिर हो चुके हैं। लेकिन जो टाइमिंग सामने आई है, वह महज अंदाजा कहकर टाली नहीं जा सकती।
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने भी इस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के करीबी लोगों ने क्रूड ऑयल मार्केट में अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाकर करोड़ों डॉलर का खेल खेला।
इस पूरे मामले को समझने के लिए कुछ घटनाएं बेहद अहम हैं। फरवरी 2026 में ईरान पर हमले से पहले अचानक 6 नए अकाउंट्स बनाए गए और उन सभी ने अमेरिकी हमले के पक्ष में भारी दांव लगाया। जैसे ही हमले की पुष्टि हुई, इन अकाउंट्स ने करीब 12 लाख डॉलर (करीब 9.9 करोड़ रुपए) कमा लिए। चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें से अधिकांश अकाउंट्स बाद में निष्क्रिय हो गए—जैसे उनका मकसद पूरा हो चुका हो।
जनवरी 2026 में एक और मामला सामने आया, जहां ‘बर्डनसम-मिक्स’ नाम का एक नया अकाउंट वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के पद छोड़ने पर दांव लगाता है। कुछ ही दिनों में मादुरो सत्ता से हटते हैं और वह अकाउंट करीब 4 करोड़ रुपए जीतकर अचानक गायब हो जाता है। इस तरह की घटनाएं संदेह को और गहरा करती हैं।
सबसे बड़ा खेल मार्च 2026 में सामने आया, जब ट्रम्प के एक सोशल मीडिया पोस्ट से ठीक 14 मिनट पहले तेल की कीमत गिरने पर बड़े पैमाने पर ‘शॉर्ट सेलिंग’ की गई। पोस्ट आते ही बाजार गिरा और कुछ ट्रेडर्स ने अनुमानित 250 करोड़ रुपए से ज्यादा का मुनाफा कमा लिया। इसी तरह 9 मार्च को भी ट्रम्प के बयान से 47 मिनट पहले तेल बाजार में भारी दांव लगाए गए, जिससे करीब 460 करोड़ रुपए का फायदा हुआ।
2025 में टैरिफ से जुड़े एक फैसले में भी यही पैटर्न देखने को मिला। ऐलान से कुछ मिनट पहले ही ट्रेडिंग वॉल्यूम 30 गुना तक बढ़ गया और कुछ लोगों ने 16.5 करोड़ लगाकर 165 करोड़ रुपए तक कमा लिए। इस मामले ने अमेरिकी संसद तक को हिला दिया और जांच की मांग उठी।
असल सवाल यही है कि क्या यह सब महज संयोग है या फिर कोई अंदरूनी खेल चल रहा है? अमेरिका में 1933 से इनसाइडर ट्रेडिंग गैरकानूनी है और 2012 में इसे और सख्त किया गया था। कानून के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति गोपनीय जानकारी के आधार पर ट्रेड करता है, तो यह गंभीर अपराध है।
लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इसे साबित करने में है। जब तक यह साबित न हो जाए कि जानकारी कहां से लीक हुई, किसने दी और किसने उसका फायदा उठाया—तब तक सजा दिलाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यही वजह है कि ऐसे कई मामले संदेह के दायरे में रहते हैं, लेकिन अदालत तक नहीं पहुंच पाते।
फिलहाल जो सामने आ रहा है, वह बाजार की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल है। अगर सच में अंदर की जानकारी के आधार पर करोड़ों का खेल खेला जा रहा है, तो यह आम निवेशकों के भरोसे के साथ सीधा धोखा है। आने वाले समय में यह मामला और गहराई से जांच के दायरे में आ सकता है, क्योंकि अब यह सिर्फ ट्रेडिंग का मुद्दा नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है।