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AI के लिए इंसानों की कुर्बानी? 20 मई को Meta में 8,000 नौकरियां जाएंगी, ‘AI-First’ प्लान से मचा हड़कंप

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टेक दुनिया में एक बार फिर बड़ी हलचल मच गई है। Meta, जो Facebook, Instagram और WhatsApp जैसी दिग्गज सेवाओं की पैरेंट कंपनी है, अब बड़े पैमाने पर छंटनी करने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 20 मई को पहले चरण में करीब 8,000 कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है, जो कंपनी की कुल वर्कफोर्स का लगभग 10% है।

यह फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है जब कंपनी आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति में है और लगातार मुनाफा कमा रही है। लेकिन इस बार वजह घाटा नहीं, बल्कि एक नई रणनीति है—‘AI-First Vision’। कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग अब Meta को पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंपनी में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

इस बड़े फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण AI में भारी निवेश है। Meta इस साल AI क्षमताओं को बढ़ाने के लिए करीब 135 अरब डॉलर खर्च करने जा रही है, जबकि 2028 तक यह आंकड़ा 600 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसका साफ मतलब है कि कंपनी अब इंसानी वर्कफोर्स की जगह मशीनों और ऑटोमेशन पर ज्यादा भरोसा करना चाहती है।

छंटनी की सबसे बड़ी मार उन कर्मचारियों पर पड़ने वाली है, जो नॉन-AI रोल्स में काम कर रहे हैं। यानी प्रोडक्ट, ऑपरेशंस और सपोर्ट से जुड़े वे लोग जिनका काम सीधे AI से जुड़ा नहीं है, वे इस कटौती की चपेट में आ सकते हैं। इसके साथ ही मिडिल मैनेजमेंट भी Meta के निशाने पर है। कंपनी अब ‘फ्लैट स्ट्रक्चर’ की ओर बढ़ रही है, जहां कम मैनेजर और ज्यादा सीधे काम करने वाले कर्मचारी होंगे।

Meta ने इस बड़े बदलाव की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी है। छंटनी से पहले कंपनी अपने कर्मचारियों को अलग-अलग विभागों में शिफ्ट कर रही है, ताकि यह तय किया जा सके कि भविष्य में किसकी जरूरत है। इसी रणनीति के तहत एक नई ‘Apply AI’ यूनिट बनाई गई है, जहां टॉप इंजीनियर्स को ट्रांसफर किया गया है। यह टीम ऐसे AI एजेंट्स पर काम कर रही है, जो बिना इंसानी मदद के कोडिंग और जटिल काम खुद कर सकें।

इसके अलावा ‘Meta Small Business’ यूनिट भी तैयार की गई है, जहां कुछ कर्मचारियों को भेजा गया है। यह पूरा प्रोसेस इस बात का संकेत है कि कंपनी पहले अपने जरूरी टैलेंट को सुरक्षित कर रही है और फिर बाकी हिस्सों में कटौती करेगी।

अगर 2026 के पूरे साल को देखें तो यह छंटनी कोई पहली घटना नहीं है। जनवरी में Reality Labs से 1,000 से ज्यादा लोग निकाले गए थे, मार्च में सेल्स और रिक्रूटिंग टीम से करीब 1,000 कर्मचारियों की छुट्टी हुई, और अब मई में 8,000 लोगों पर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में आशंका है कि साल के अंत तक यह आंकड़ा 2022-23 के ‘Year of Efficiency’ को भी पीछे छोड़ सकता है, जब करीब 21,000 नौकरियां खत्म हुई थीं।

हालांकि इस बार स्थिति अलग है। तब Meta घाटे से जूझ रही थी, लेकिन अब कंपनी मुनाफे में है। इसके बावजूद छंटनी का फैसला यह दिखाता है कि टेक इंडस्ट्री में अब प्राथमिकता बदल चुकी है। अब कंपनियां कम लोगों के साथ ज्यादा काम करने और AI पर निर्भर रहने की दिशा में तेजी से बढ़ रही हैं।

कुल मिलाकर, Meta का यह कदम सिर्फ एक कंपनी का फैसला नहीं, बल्कि पूरे टेक सेक्टर के बदलते भविष्य की झलक है—जहां AI की तेजी इंसानी नौकरियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है।

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