छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में शिक्षा का अधिकार यानी RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाकर सरकार ने न सिर्फ व्यवस्था को सरल किया है, बल्कि पारदर्शिता और निष्पक्षता को भी नई मजबूती दी है। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन हजारों परिवारों पर पड़ा है, जो अब बिना किसी दौड़-भाग और अनिश्चितता के अपने बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा का सपना देख पा रहे हैं।
पहले जहां RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया जटिल और काफी हद तक मैनुअल थी, वहीं अब यह पूरी तरह तकनीक आधारित हो चुकी है। अभिभावकों को पहले स्कूलों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती थी। साथ ही चयन प्रक्रिया को लेकर भी कई बार सवाल उठते थे। लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आवेदन से लेकर चयन तक हर चरण ऑनलाइन हो गया है, जिससे मानव हस्तक्षेप लगभग खत्म हो गया है और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन गई है।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए इस नई व्यवस्था के तहत कुल 38,439 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 27,203 बच्चों को पात्र पाया गया। इन पात्र आवेदनों में से 14,403 बच्चों का चयन कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किया गया। यह पूरी प्रक्रिया स्वचालित रही, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या पक्षपात की संभावना खत्म हो गई। अभिभावकों को चयन की जानकारी सीधे पोर्टल के माध्यम से मिल रही है, जिससे उन्हें किसी भी स्तर पर भटकना नहीं पड़ता।
सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को भी बेहद आसान और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया है। अब अभिभावक घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या नजदीकी चॉइस सेंटर की मदद ले सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि आवेदन के दौरान ही सिस्टम अभिभावकों को उनके घर से 1.5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले निजी स्कूलों की जानकारी और वहां उपलब्ध सीटों का पूरा विवरण दिखाता है। इससे उन्हें अपने बच्चे के लिए सही स्कूल चुनने में काफी मदद मिलती है।
RTE के प्रावधानों के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। इस योजना के जरिए राज्य में पहले से ही 3 लाख 63 हजार से अधिक छात्र लाभान्वित हो रहे हैं। सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना की फीस प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया है, जिससे ज्यादा से ज्यादा बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
छत्तीसगढ़ की यह व्यवस्था अन्य राज्यों के मुकाबले अधिक संतुलित और प्रभावी मानी जा रही है। यहां कक्षा 1 से 5 तक प्रति छात्र 7000 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक 11,400 रुपये की वार्षिक प्रतिपूर्ति तय की गई है। इससे निजी स्कूलों को भी योजना में भागीदारी के लिए प्रोत्साहन मिलता है और छात्रों को बेहतर अवसर मिलते हैं।
यह बदलाव केवल RTE तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में डिजिटल सुशासन की व्यापक सोच का हिस्सा है। e-Office, CMO पोर्टल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से प्रशासन को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाया जा रहा है। वहीं सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम और कंप्यूटर सुविधाओं का विस्तार कर शिक्षा को आधुनिक बनाया जा रहा है। ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ जैसे नवाचारों के जरिए छात्रों की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
अगर पहले और अब की स्थिति की तुलना करें तो फर्क साफ नजर आता है। पहले जहां प्रक्रिया सीमित, जटिल और कम पारदर्शी थी, वहीं अब यह आसान, व्यापक और भरोसेमंद बन चुकी है। आवेदन की बढ़ती संख्या और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि यह बदलाव जमीन पर असरदार साबित हो रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकार की प्राथमिकता हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। इसी सोच के साथ RTE की डिजिटल प्रक्रिया को लागू किया गया है, जो समान अवसर और सामाजिक समावेशन की दिशा में एक मजबूत कदम है।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में RTE के तहत लागू की गई यह डिजिटल प्रणाली न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में सुधार का संकेत है, बल्कि यह राज्य को डिजिटल गवर्नेंस के एक मजबूत मॉडल के रूप में भी स्थापित कर रही है। यह पहल हजारों बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने के साथ-साथ शिक्षा के अधिकार को वास्तविक रूप में लागू करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो रही है।