छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों का आंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। लंबे समय से असहयोग आंदोलन कर रहे प्रदेश के करीब 6800 निजी स्कूलों ने अब विरोध जताने के लिए ‘गांधीगिरी’ का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। Raipur समेत पूरे राज्य में स्कूल संचालक अब शासन के प्रतिनिधियों को गुलाब भेजेंगे और प्रेम-पत्र लिखकर अपनी मांगों को सामने रखेंगे।
यह प्रेम-पत्र केवल प्रतीकात्मक नहीं होंगे, बल्कि इनमें स्कूल संचालक अपनी समस्याओं और मांगों को विस्तार से बताएंगे। उनका मानना है कि शांतिपूर्ण और सकारात्मक तरीके से अपनी बात रखने से सरकार तक संदेश ज्यादा प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।
दरअसल, निजी स्कूलों की मुख्य मांग आरटीई के तहत पढ़ने वाले गरीब छात्रों की फीस में बढ़ोतरी को लेकर है। उनका कहना है कि 2012 में लागू हुए नियमों के बाद से अब तक फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि स्कूलों का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा वे यह भी चाहते हैं कि सरकार यह स्पष्ट करे कि शासकीय स्कूलों में प्रति छात्र कितना खर्च किया जा रहा है, ताकि उसी आधार पर निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि तय हो सके।
पिछले कुछ समय से यह आंदोलन लगातार तेज होता गया है। 1 मार्च से असहयोग आंदोलन शुरू किया गया, जिसके तहत स्कूलों ने कई सख्त कदम उठाए। 17 अप्रैल को शिक्षकों और संचालकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया, जबकि 18 अप्रैल को स्कूल पूरी तरह बंद रखे गए। इससे पहले यह भी फैसला लिया गया था कि आरटीई के तहत लॉटरी से चयनित छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
अब आंदोलन के अगले चरण में 23 अप्रैल को सभी स्कूल संचालक अपने-अपने लेटर पैड पर स्कूल शिक्षा मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखेंगे। इसके अगले दिन यानी 24 अप्रैल को वे व्यक्तिगत रूप से जनप्रतिनिधियों से मिलकर उन्हें गुलाब भेंट करेंगे और अपनी मांगों को समझाने की कोशिश करेंगे।
इस बीच निजी स्कूल संघ ने अपनी मांगों में एक नया मुद्दा भी जोड़ दिया है। अब वे चाहते हैं कि आरटीई के तहत सिर्फ पहली कक्षा ही नहीं, बल्कि नर्सरी, पीपी-1 और पीपी-2 में भी बच्चों को प्रवेश दिया जाए। दरअसल, हाल ही में नियमों में बदलाव के बाद प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के तहत प्रवेश बंद कर दिया गया है, जिसका स्कूल संचालक विरोध कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, निजी स्कूलों का यह आंदोलन अब टकराव से हटकर संवाद और सकारात्मक विरोध की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। ‘गुलाब और प्रेम-पत्र’ के जरिए वे सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं—अब देखना होगा कि इस गांधीगिरी का क्या असर पड़ता है।