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सॉफ्टवेयर गड़बड़ी से 8 लाख राशन कार्डधारक वंचित, अब सरकार ने खोला विकल्प—एक साथ मिलेगा चार महीने का चावल

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छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की बड़ी खामी सामने आने के बाद अब सरकार हरकत में आई है। मार्च महीने में तकनीकी गड़बड़ी और प्रशासनिक लापरवाही के चलते करीब 8 लाख राशन कार्डधारकों को खाद्यान्न नहीं मिल पाया था। यह समस्या नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर द्वारा किए गए सॉफ्टवेयर अपडेट और उसमें आई तकनीकी खराबियों के कारण उत्पन्न हुई थी, जिससे ई-पॉस मशीनों के जरिए वितरण बाधित हो गया।

अब इस गंभीर स्थिति को सुधारने के लिए शासन ने छूटे हुए हितग्राहियों को मार्च का राशन देने का आदेश जारी कर दिया है। इसके लिए सॉफ्टवेयर में विशेष रूप से मार्च महीने का विकल्प फिर से सक्रिय किया गया है, ताकि जिन लोगों को उस समय राशन नहीं मिला था, उन्हें अब उनका हक मिल सके।

इस फैसले के बाद कई लाभार्थियों को एक साथ चार महीने का चावल मिलने वाला है। दरअसल, अप्रैल माह में पहले से ही अप्रैल, मई और जून का राशन वितरित किया जा रहा है, और अब इसमें मार्च का छूटा हुआ खाद्यान्न भी जोड़ दिया गया है। इससे बीपीएल समेत कई वर्गों के हितग्राहियों को एकमुश्त बड़ा लाभ मिलने जा रहा है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति की गंभीरता साफ दिखाई देती है। मार्च महीने में जहां कुल 80 लाख 58 हजार से ज्यादा राशन कार्ड पंजीकृत थे, वहीं सिर्फ 71 लाख 72 हजार से कुछ अधिक लोगों को ही खाद्यान्न मिल पाया। यानी करीब 8 लाख लोग इस व्यवस्था की खामियों के कारण वंचित रह गए। वितरण में यह बाधा मुख्य रूप से महीने के अंतिम दिनों में आई, जब सॉफ्टवेयर अपडेट के चलते लगभग 5 दिन तक वितरण पूरी तरह ठप रहा और बाद में तकनीकी समस्याओं के कारण तीन दिन और प्रभावित रहा।

इसके अलावा कुछ स्थानों पर खाद्यान्न के पर्याप्त भंडारण की कमी भी वितरण बाधित होने की एक वजह रही। इन सभी कारणों ने मिलकर हजारों परिवारों को उनके जरूरी राशन से दूर कर दिया।

इस पूरे मामले पर रायपुर के खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि अब सभी राशन दुकानों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे छूटे हुए हितग्राहियों को सूचित करें और उन्हें मार्च का खाद्यान्न उपलब्ध कराएं।

यह घटनाक्रम एक बार फिर यह दिखाता है कि तकनीकी सुधार के नाम पर की गई छोटी सी चूक भी आम जनता पर कितना बड़ा असर डाल सकती है। हालांकि, सरकार के इस फैसले से अब प्रभावित लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों से बचने के लिए सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत भी साफ नजर आती है।

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