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टेलीकॉम सेक्टर में तेज हुई जंग: मार्च में रिकॉर्ड नए ग्राहक जुड़े, एयरटेल सबसे आगे

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भारत का टेलीकॉम सेक्टर एक बार फिर तेजी के दौर में है, जहां कंपनियों के बीच ग्राहकों को जोड़ने की होड़ और तेज हो गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार मार्च का महीना इस सेक्टर के लिए बेहद शानदार साबित हुआ है। Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) के डेटा ने साफ कर दिया है कि देश में मोबाइल यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है और कंपनियां नए ग्राहकों को आकर्षित करने में पूरी ताकत झोंक रही हैं।

इस दौड़ में सबसे आगे रही Bharti Airtel, जिसने मार्च महीने में 50.9 लाख नए यूजर्स अपने नेटवर्क से जोड़े। यह आंकड़ा फरवरी के मुकाबले काफी ज्यादा है, जिससे साफ है कि कंपनी की पकड़ बाजार में मजबूत होती जा रही है।

वहीं Reliance Jio ने भी जोरदार वापसी करते हुए अपनी रफ्तार दोगुनी कर दी। फरवरी में जहां कंपनी ने करीब 16.2 लाख नए ग्राहक जोड़े थे, वहीं मार्च में यह संख्या बढ़कर 32.3 लाख तक पहुंच गई। इससे यह साफ है कि जियो भी इस प्रतिस्पर्धा में पीछे रहने के मूड में नहीं है।

आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही Vodafone Idea (Vi) के लिए भी यह महीना राहत भरा रहा। फरवरी में बेहद कम ग्राहकों को जोड़ने वाली कंपनी ने मार्च में सुधार दिखाते हुए 1.03 लाख नए यूजर्स जोड़े। यह संकेत है कि कंपनी धीरे-धीरे अपनी स्थिति संभालने की कोशिश कर रही है।

सरकारी कंपनी BSNL के लिए भी मार्च सकारात्मक साबित हुआ। फरवरी में ग्राहकों के नुकसान के बाद BSNL ने वापसी करते हुए 17 हजार से ज्यादा नए यूजर्स जोड़े, जो उसके लिए एक अच्छा संकेत माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, भारत में मार्च महीने में 84.3 लाख नए मोबाइल सब्सक्राइबर्स जुड़े, जो फरवरी के 64 लाख के मुकाबले काफी ज्यादा हैं। यानी देश में मोबाइल और इंटरनेट की मांग लगातार बढ़ रही है और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी उसी हिसाब से तेज हो रही है।

इस बीच Telecom Regulatory Authority of India एक और बड़े बदलाव की तैयारी में है। दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए अब Direct-to-Device (D2D) तकनीक पर काम किया जा रहा है। इस तकनीक के जरिए बिना मोबाइल टावर के सीधे सैटेलाइट से फोन पर नेटवर्क पहुंचाने की योजना है।

TRAI ने इस संबंध में कंसल्टेशन पेपर जारी कर कंपनियों से राय मांगी है कि इस सेवा के लिए सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का उपयोग किया जाए या मौजूदा 4G-5G नेटवर्क के जरिए इसे लागू किया जाए। अगर यह तकनीक सफल होती है, तो देश के उन इलाकों में भी नेटवर्क पहुंच सकेगा जहां आज तक कनेक्टिविटी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।

कुल मिलाकर, टेलीकॉम सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा जहां ग्राहकों के लिए नए विकल्प लेकर आ रही है, वहीं आने वाले समय में तकनीकी बदलाव इस इंडस्ट्री को पूरी तरह बदल सकते हैं।

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