शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। BSE Sensex 1100 अंकों से ज्यादा टूटकर कारोबार करता दिखा, जबकि Nifty 50 भी 24,000 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। लगातार दूसरे दिन की गिरावट ने बाजार का मूड पूरी तरह बदल दिया है और निवेशकों का भरोसा कमजोर होता नजर आ रहा है।
दोपहर तक स्थिति और बिगड़ती दिखी, जहां सेंसेक्स करीब 1200 अंक गिरकर 76,000 के आसपास आ गया, वहीं निफ्टी भी 23,800 के करीब पहुंच गया। इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण एक साथ काम करते दिखे—महंगा होता कच्चा तेल, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, आईटी सेक्टर में भारी दबाव और वैश्विक तनाव।
सबसे बड़ा झटका कच्चे तेल की कीमतों से लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जिससे आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने की आशंका ने बाजार की चिंता और गहरी कर दी है।
इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार को नीचे धकेला। लगातार चौथे सत्र में एफआईआई ने बड़े पैमाने पर शेयर बेचे, जिससे लार्ज-कैप स्टॉक्स पर खासा दबाव देखने को मिला। यह संकेत है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल जोखिम से दूरी बना रहे हैं।
सबसे ज्यादा मार IT सेक्टर पर पड़ी। Infosys, TCS, HCL Technologies और Tech Mahindra जैसे दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट आई। निफ्टी IT इंडेक्स करीब 5% टूट गया, जो दिन का सबसे कमजोर सेक्टर रहा। कमजोर कारोबारी संकेतों और वैश्विक अनिश्चितता के चलते निवेशकों ने IT शेयरों से दूरी बनाई।
वैश्विक बाजारों से भी अच्छे संकेत नहीं मिले। अमेरिकी बाजारों में गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि कुछ क्षेत्रों में हल्की राहत की खबरें आईं, लेकिन ऊंचे तेल दाम और अनिश्चित माहौल ने बाजार को संभलने नहीं दिया।
डर का सूचकांक यानी इंडिया VIX भी करीब 4% बढ़कर 19 के ऊपर पहुंच गया, जो बताता है कि बाजार में घबराहट बढ़ रही है। लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे—चाहे फार्मा हो, FMCG या रियल्टी। बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही, जिससे साफ है कि गिरावट व्यापक स्तर पर देखने को मिली।
कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में बाजार कई दबावों के बीच घिरा हुआ है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत, तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख किस दिशा में जाता है।