Meta Pixel

छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में बड़ा उछाल: किसानों को राहत, लेकिन टैक्स कलेक्शन दोगुना से ज्यादा

Spread the love

छत्तीसगढ़ में एक दिलचस्प आर्थिक तस्वीर सामने आई है, जहां एक तरफ किसानों को राहत देने के चलते लगान यानी भू-राजस्व की वसूली में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ राज्य का कुल कर संग्रह तेजी से बढ़ा है। पिछले पांच सालों में यह बढ़ोतरी इतनी तेज रही है कि राज्य के खुद के टैक्स रेवेन्यू में दोगुने से भी ज्यादा इजाफा दर्ज किया गया है।

Comptroller and Auditor General of India (CAG) की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020-21 में जहां राज्य का स्वयं का कर संग्रह करीब 22,889 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर 44,764 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। यानी लगभग 95% से अधिक की वृद्धि, जो इस बात का संकेत है कि राज्य की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है।

इस वृद्धि के पीछे कई बड़े कारण सामने आए हैं। सबसे बड़ा योगदान स्टेट GST, उत्पाद शुल्क और बिजली कर का रहा है। खासतौर पर State GST से होने वाली आय में 100% से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो करीब 7,900 करोड़ से बढ़कर 16,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। इसी तरह राज्य उत्पाद शुल्क भी दोगुना होकर 10,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। यह साफ दिखाता है कि राज्य में उपभोग और व्यापारिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।

रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भी तेज़ी देखने को मिली है। स्टांप और पंजीयन शुल्क में करीब 87% की वृद्धि हुई है, जो जमीन और संपत्ति की बढ़ती खरीद-फरोख्त का संकेत देता है। वहीं परिवहन कर और बिजली कर में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जो लोगों की बढ़ती क्रय शक्ति और औद्योगिक विस्तार को दर्शाता है।

हालांकि, इस पूरे ग्रोथ के बीच एक सेक्टर ऐसा भी है जहां गिरावट दर्ज की गई है—और वह है भू-राजस्व यानी लगान। 2021-22 में जहां यह करीब 950 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में घटकर लगभग 819 करोड़ रुपये रह गया। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं।

पहला कारण है सरकार की कृषि हितैषी नीति, जिसके तहत छोटे और सीमांत किसानों को राहत देने के लिए लगान में छूट या माफी दी जाती है। दूसरा बड़ा कारण है जमीन से जुड़े रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण। ‘भुइयां’ जैसे ऑनलाइन पोर्टल के जरिए पुराने रिकॉर्ड्स को साफ किया गया, जिससे कई डुप्लिकेट या गलत एंट्री हट गईं और राजस्व आंकड़ों में गिरावट दिखाई देने लगी।

इसके अलावा, तेजी से हो रहा शहरीकरण और औद्योगीकरण भी एक वजह है। जब कृषि भूमि को औद्योगिक या आवासीय उपयोग में बदला जाता है, तो वह भू-राजस्व के दायरे से बाहर हो जाती है और अन्य टैक्स श्रेणियों में शामिल हो जाती है। इससे लगान घटता है, लेकिन स्टांप शुल्क और अन्य कर बढ़ जाते हैं।

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था एक संतुलित दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है—जहां किसानों को राहत भी मिल रही है और राज्य की आय भी लगातार बढ़ रही है। यह मॉडल बताता है कि सही नीतियों के साथ विकास और सामाजिक संतुलन दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *