छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2026 को एक खास सामाजिक उद्देश्य के साथ जोड़ा है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने नए साल की शुरुआत पर इसे ‘महतारी गौरव वर्ष’ घोषित करते हुए साफ संकेत दिया कि राज्य की विकास नीति अब महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर आगे बढ़ेगी। छत्तीसगढ़ी संस्कृति में “महतारी” सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि मातृशक्ति के प्रति गहरे सम्मान का प्रतीक है, और इसी भावना को शासन की नीतियों में उतारने की कोशिश की जा रही है।
इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की भागीदारी को सामाजिक, आर्थिक और निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक रूप से बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि जब तक महिलाओं को बराबरी का अवसर और संसाधन नहीं मिलेंगे, तब तक संतुलित विकास संभव नहीं है। इसलिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार को जोड़कर एक व्यापक ढांचा तैयार किया गया है।
इस दिशा में सबसे अहम भूमिका निभा रही है ‘महतारी वंदन योजना’। मार्च 2024 में शुरू हुई इस योजना के तहत 21 वर्ष से अधिक आयु की विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को हर महीने ₹1000 की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में दी जा रही है। लगभग 70 लाख महिलाएं इस योजना से जुड़ चुकी हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि परिवार के फैसलों में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है। अब इस योजना को और पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग और eKYC जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं।
राज्य सरकार ने बजट में भी इस सोच को प्राथमिकता दी है। वित्त मंत्री OP Choudhary द्वारा प्रस्तुत बजट में महिलाओं के लिए कई ठोस प्रावधान किए गए हैं। 250 “महतारी सदनों” के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो महिलाओं के लिए प्रशिक्षण, संवाद और कौशल विकास के केंद्र बनेंगे। यह पहल महिलाओं को संगठित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
इसके साथ ही आंगनबाड़ी सेवाओं और पोषण कार्यक्रमों को भी मजबूत किया गया है। बच्चों, किशोरियों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सैकड़ों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे भविष्य की पीढ़ी को बेहतर पोषण और देखभाल मिल सके।
बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पात्र बालिकाओं को 18 वर्ष की उम्र पूरी होने पर ₹1.50 लाख की सहायता देने का प्रावधान किया गया है, जिससे वे उच्च शिक्षा और कौशल विकास की दिशा में आगे बढ़ सकें।
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्व-सहायता समूहों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘लखपति दीदी’ जैसी पहल के जरिए महिलाओं को प्रशिक्षण, भ्रमण और नए व्यवसायिक अवसर दिए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा आई है और कई महिलाएं अब खुद रोजगार पैदा कर रही हैं।
राज्य में कई प्रेरणादायक उदाहरण सामने आए हैं—कोरबा की सावित्री उरांव, जशपुर की पूनम देवी और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की बृहस्पति धुर्वे जैसी महिलाएं अब आत्मनिर्भर बनकर दूसरों के लिए मिसाल बन चुकी हैं। ये कहानियां दिखाती हैं कि योजनाएं जमीन पर असर डाल रही हैं।
इसके अलावा स्वास्थ्य शिविर, डिजिटल साक्षरता अभियान और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को आधुनिक व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे सरकारी योजनाओं और तकनीक का पूरा लाभ उठा सकें।
कुल मिलाकर, ‘महतारी गौरव वर्ष 2026’ सिर्फ एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन का अभियान बनकर उभर रहा है। Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहां महिलाओं की भागीदारी ही विकास की असली ताकत मानी जा रही है।