छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के बिरेझर चौकी क्षेत्र से सामने आए नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 3 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह फैसला महिला और बाल अपराधों के खिलाफ न्यायिक सख्ती का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को अहम आधार माना। पुलिस द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक सबूत और मजबूत केस प्रस्तुति के चलते आरोपी टिकेन्द्र कुमार बांधे, निवासी ग्राम मुल्ले, को दोषी करार दिया गया। यह प्रकरण विभिन्न धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया था, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।
जांच प्रक्रिया में बिरेझर चौकी पुलिस की भूमिका भी निर्णायक रही। विवेचना अधिकारी उपनिरीक्षक अजय सिंह और उनकी टीम ने हर पहलू की गहराई से जांच करते हुए अदालत में ठोस साक्ष्य पेश किए। यही कारण रहा कि कोर्ट में केस मजबूत बना और आरोपी को कठोर सजा दिलाई जा सकी।
धमतरी पुलिस अधीक्षक ने इस उत्कृष्ट विवेचना के लिए जांच अधिकारी को नगद पुरस्कार देने की घोषणा की है। इसे पुलिस बल में बेहतर कार्य और जिम्मेदारी के साथ जांच करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में देखा जा रहा है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि महिला और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जा रही है। ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाना प्राथमिकता है, ताकि समाज में कानून के प्रति विश्वास बना रहे और अपराधियों में भय कायम हो।
यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि ऐसे अपराधों पर कानून बेहद सख्त है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।