छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया, जहां एक युवती ने घर में घुसकर आरक्षक की पत्नी और मासूम बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी। यह वारदात न सिर्फ क्रूरता की हद पार करती है, बल्कि रिश्तों के उलझे हुए जाल और भावनात्मक तनाव के खतरनाक परिणाम को भी सामने लाती है। बताया जा रहा है कि आरोपी युवती ने पहले घर में सामान्य तरीके से प्रवेश किया, खाना खाया और फिर अचानक चाकू निकालकर हमला कर दिया।
यह घटना सुपेला थाना क्षेत्र स्थित STF कॉलोनी की है, जहां आरक्षक ललितेश यादव की अनुपस्थिति में यह खौफनाक हमला हुआ। उस समय घर में उनकी पत्नी रीना यादव, 9 साल का बेटा आदित्य और दो बेटियां मौजूद थीं। आरोपी युवती, जिसकी पहचान सरोजनी भारद्वाज के रूप में हुई है, कथित तौर पर आरक्षक के साथ संबंध में थी और शादी के लिए दबाव बना रही थी। इसी विवाद ने इस हत्याकांड का रूप ले लिया।
घटना की शुरुआत बेहद सामान्य तरीके से हुई। युवती सुबह घर पहुंची और उसने खाना मांगा। घर की महिला ने उसे पूरी-सब्जी परोस दी। सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन इसी बीच जब घर के सदस्य अपने-अपने काम में व्यस्त थे, तब आरोपी ने अचानक सो रहे बच्चे पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इसके बाद उसने महिला पर भी कई वार किए। बताया जा रहा है कि बच्चे पर 14 और महिला पर 18 बार चाकू से हमला किया गया, जिससे दोनों की हालत गंभीर हो गई और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
इस पूरे हमले के दौरान घर की दो बेटियों ने किसी तरह अपनी जान बचाई। एक बेटी मौके से भागकर पड़ोसियों को बुलाने में सफल रही, जबकि दूसरी ने बाथरूम में छिपकर खुद को सुरक्षित रखा। घायल अवस्था में मां ने भी अपनी बेटियों को बचाने के लिए संघर्ष किया और उन्हें भागने के लिए कहा। पड़ोसियों के पहुंचते ही आरोपी को काबू में किया गया और उसके हाथ से चाकू छीनकर पुलिस को सौंप दिया गया।
जांच में सामने आया है कि आरक्षक और आरोपी युवती के बीच लंबे समय से संपर्क था, जो सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुआ था। युवती लगातार शादी का दबाव बना रही थी और एक दिन पहले भी वह घर पहुंची थी, लेकिन उस समय उसे समझाकर वापस भेज दिया गया था। घटना के दिन सुबह वह फिर से घर पहुंची और कुछ ही घंटों में यह खौफनाक वारदात हो गई।
पुलिस के अनुसार आरोपी युवती को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और हत्या व हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया गया है। इस घटना ने न सिर्फ इलाके में दहशत फैला दी है, बल्कि यह सवाल भी खड़े कर दिए हैं कि व्यक्तिगत संबंधों के विवाद किस हद तक खतरनाक रूप ले सकते हैं।
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि भावनात्मक तनाव, असफल रिश्ते और असंतुलित निर्णय किस तरह एक पूरे परिवार को तबाह कर सकते हैं। दुर्ग की यह वारदात केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के सामने एक चेतावनी भी है कि रिश्तों में बढ़ता तनाव अगर समय रहते नहीं संभाला गया, तो उसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है।