यह विशाल डेटा सेंटर विशाखापत्तनम के थारलुवाडा, अदविवरम और रामबिल्ली क्षेत्रों में करीब 600 एकड़ जमीन पर विकसित किया जाएगा। इसकी कुल क्षमता 1 गीगावॉट होगी, जो इसे देश के सबसे बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स में शामिल करती है। सरकार का मानना है कि यह सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि राज्य की डिजिटल पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का बड़ा कदम है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना में AdaniConneX और Airtel Nxtra जैसी कंपनियां भी साझेदार हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में 6.5 गीगावॉट क्षमता वाला एक विशाल डिजिटल हब तैयार करना है, जिससे आंध्र प्रदेश टेक्नोलॉजी का बड़ा केंद्र बन सके।
🚀 एशिया का AI गेटवे बनने की ओर विजाग
विशाखापत्तनम को इस प्रोजेक्ट के बाद एशिया के प्रमुख AI हब के रूप में देखा जा रहा है। समुद्री केबल कनेक्टिविटी के कारण यह शहर अंतरराष्ट्रीय डिजिटल नेटवर्क से सीधे जुड़ सकेगा, जिससे डेटा ट्रांसफर और क्लाउड सेवाओं की गति और क्षमता दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। इससे वैश्विक टेक कंपनियों का ध्यान भी इस शहर की ओर तेजी से आकर्षित हो रहा है।
💼 हजारों नौकरियों का नया दरवाजा
यह डेटा सेंटर सिर्फ तकनीकी ढांचा नहीं, बल्कि रोजगार का बड़ा स्रोत बनने वाला है। AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस और नेटवर्किंग जैसे क्षेत्रों में हजारों नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही पावर, कूलिंग सिस्टम, सर्वर मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सेक्टर्स में भी बड़े पैमाने पर निवेश आएगा, जिससे एक मजबूत AI इकोसिस्टम तैयार होगा।
🌱 ग्रीन एनर्जी के साथ डिजिटल विकास
इतने बड़े डेटा सेंटर को चलाने के लिए भारी ऊर्जा की जरूरत होगी, जिसे पूरा करने के लिए सरकार ग्रीन एनर्जी पर खास जोर दे रही है। साथ ही भोगापुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जैसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट इस शहर की वैश्विक कनेक्टिविटी को और मजबूत करेंगे।
कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश को टेक्नोलॉजी, रोजगार और वैश्विक पहचान के नए दौर में ले जाने वाला कदम है। आने वाले समय में विशाखापत्तनम भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया के AI नक्शे पर एक अहम केंद्र के रूप में उभर सकता है।