अभिनेता प्रकाश राज ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उमर खालिद को लेकर बयान दिया, जिससे एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। बेंगलुरु इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित “Umar Khalid and His World” विषय पर पैनल चर्चा में उन्होंने कहा कि खालिद का जेल में होना केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र और असहमति की आवाज से जुड़ा मुद्दा है।
इस चर्चा में इतिहासकार रामचंद्र गुहा और जानकी नायर भी शामिल थे। कार्यक्रम के दौरान प्रकाश राज ने कहा कि उमर खालिद “हम सबके लिए खड़े हैं” और उनका जेल में होना इस बात का प्रतीक है कि असहमति की आवाज को दबाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि खालिद इसलिए जेल में हैं ताकि देश जेल में तब्दील न हो जाए—यह बयान सीधे तौर पर लोकतांत्रिक मूल्यों की ओर इशारा करता है।
प्रकाश राज ने सत्ता पक्ष पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनावी माहौल में बड़े नेता लोगों से कहते हैं कि “हमें वोट दो, हम तुम्हें आजादी देंगे”, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक सोच के विपरीत बताया। उनका कहना था कि वे इस कार्यक्रम में इसलिए आए हैं क्योंकि यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज से जुड़ा है।
गौरतलब है कि उमर खालिद, जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता रहे हैं, फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े साजिश के मामले में 14 सितंबर 2020 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी। उनके खिलाफ UAPA सहित कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज है।
हाल ही में 20 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका से जुड़े फैसले की समीक्षा याचिका भी खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ लगे आरोपों को मानने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। ऐसे में खालिद अब भी लंबे समय से बिना ट्रायल पूरा हुए जेल में हैं।
यह पूरा मामला अब सिर्फ एक कानूनी केस नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र और राजनीतिक ध्रुवीकरण जैसे बड़े मुद्दों के केंद्र में आ गया है, जिस पर देशभर में अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं।