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छत्तीसगढ़ में ED का बड़ा एक्शन — 17 किलो सोना, करोड़ों की संपत्ति और घोटालों की परतें खुलती हुई

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छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले और भारतमाला मुआवजा गड़बड़ी की जांच ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। Enforcement Directorate (ED) की टीम ने एक साथ कई शहरों में दबिश देकर ऐसे खुलासे किए हैं, जो पूरे मामले को और गंभीर बना देते हैं। कार्रवाई का केंद्र बना Bilaspur, जहां कारोबारी विवेक अग्रवाल के ठिकानों पर करीब 22 घंटे तक चली जांच के दौरान भारी मात्रा में संपत्ति और दस्तावेज खंगाले गए।

सूत्रों के मुताबिक, इस रेड में करीब 17 किलो सोना, हीरों के हार और बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की गई है। हालांकि इस बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियों की गतिविधियों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि मामला बेहद बड़े आर्थिक नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। विवेक अग्रवाल, फरार आरोपी विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू के भाई हैं, जिनकी तलाश पिछले चार साल से जारी है।

कार्रवाई की शुरुआत तड़के हुई, जब ED की टीम ने मैग्नेटो मॉल स्थित निवास को घेर लिया। सुरक्षा के लिए CRPF के जवानों की तैनाती की गई और घर के सभी एंट्री पॉइंट्स को सील कर दिया गया। इसके बाद घंटों तक दस्तावेजों, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच चलती रही। इसी दौरान टीम ने सदर बाजार स्थित ज्वेलरी शॉप पर भी छापा मारकर स्टॉक और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले।

जांच एजेंसियों को शक है कि फरार विकास अग्रवाल के वित्तीय लेनदेन और निवेश की कड़ियां उसके भाई के कारोबार में छिपी हो सकती हैं। इसी वजह से ED अब उन संभावित बेनामी संपत्तियों और ज्वेलरी निवेश की जांच कर रही है, जो पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं।

यह पूरा मामला कथित शराब घोटाले के उस सिंडिकेट से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें कारोबारी अनवर ढेबर का नाम सामने आता रहा है। जांच के अनुसार, इस नेटवर्क में विकास अग्रवाल और विवेक अग्रवाल की भूमिका वसूली और कमीशन सिस्टम को संभालने की बताई जा रही है। आरोप है कि शराब दुकानों से अवैध रूप से पैसा इकट्ठा कर इस नेटवर्क के जरिए आगे पहुंचाया जाता था।

सिर्फ बिलासपुर ही नहीं, बल्कि Durg और भिलाई में भी ED की कार्रवाई ने हलचल मचा दी। दुर्ग में अमर इंफ्रा से जुड़े कारोबारी और भाजपा नेता चतुर्भुज राठी के ठिकानों पर छापा मारकर उनकी कई कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले गए। इन कंपनियों का संबंध सड़क निर्माण, कोयला खनन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से बताया जा रहा है।

भिलाई में गोविंद मंडल के घर और फैक्ट्री में भी टीम पहुंची और घंटों जांच की। हालांकि मंडल का कहना है कि टीम गलती से उनके यहां पहुंच गई थी और उन्हें किसी अन्य स्थान पर जाना था। इसके बावजूद, इस कार्रवाई ने पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है।

इस जांच की जड़ें भारतमाला परियोजना से जुड़े मुआवजा घोटाले तक भी पहुंचती हैं, जहां जमीन अधिग्रहण में करोड़ों की गड़बड़ी सामने आई थी। आरोप है कि जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अधिक मुआवजा दिखाया गया और फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी रकम का दुरुपयोग किया गया। इस मामले में कई अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है, जिसमें निलंबन और जांच शामिल हैं।

वहीं शराब घोटाले की बात करें तो जांच एजेंसियों का दावा है कि इसमें 3 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का खेल हुआ है। आरोपों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क एक संगठित सिंडिकेट के जरिए चलाया गया, जिसमें अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों की मिलीभगत थी। अलग-अलग कैटेगरी में बंटे इस घोटाले में डिस्टलरी से कमीशन वसूली, नकली होलोग्राम के जरिए शराब बिक्री और रिकॉर्ड में हेरफेर जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

कुल मिलाकर, ED की यह कार्रवाई सिर्फ एक रेड नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में लंबे समय से चल रहे कथित आर्थिक घोटालों की परतें खोलने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस जांच से और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज होने की पूरी संभावना है।

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