पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का महापर्व उस वक्त विवादों में घिर गया जब दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा क्षेत्र से गड़बड़ी की गंभीर शिकायतें सामने आईं। दरअसल, यहां मतदान के चरणों के दौरान कई इलाकों में हिंसा और मतदाताओं को डराने-धमकाने के आरोप लगे। स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर हाशिमनगर गांव के लोगों का आरोप था कि टीएमसी उम्मीदवार के करीबियों ने उन्हें परिणाम आने के बाद गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। विवाद इतना बढ़ा कि शनिवार को पहले ही दक्षिण 24 परगना के 15 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान कराना पड़ा था।
इसके बावजूद फलता में स्थिति तनावपूर्ण बनी रही और स्ट्रांग रूम की सुरक्षा को लेकर भी कुणाल घोष जैसे नेताओं ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए अब आयोग ने केवल कुछ बूथ नहीं, बल्कि फलता के सभी 285 केंद्रों पर फिर से चुनाव कराने का निर्णय लिया है।
21 मई को दोबारा सजेगा चुनावी अखाड़ा
निर्वाचन आयोग के आदेश के मुताबिक, अब फलता विधानसभा के सभी 285 बूथों पर एक साथ पुनः मतदान कराया जाएगा। मतदान की तारीख 21 मई 2026 सुनिश्चित की गई है, जहाँ सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोट डाले जाएंगे। आयोग का मानना है कि पूरी विधानसभा में एक साथ वोटिंग कराने से माहौल समान रहेगा और शरारती तत्वों को गड़बड़ी का मौका नहीं मिलेगा। सहायक मतदान केंद्रों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
प्रशासन और सुरक्षा की कड़ी घेराबंदी
इस बार निर्वाचन आयोग किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। स्ट्रांग रूम की सुरक्षा को लेकर आयोग ने अपनी पिछली चूक स्वीकार की है और अब वहां सीसीटीवी कैमरों के साथ लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है। 21 मई के मतदान के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कंपनियों को बुलाया गया है। जिलाधिकारी और चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर बूथ की पल-पल की निगरानी करें ताकि मतदाता बिना किसी भय के अपने घरों से निकल सकें।
24 मई को साफ होगी अंतिम तस्वीर
फलता में होने वाली इस रि-पोलिंग का सीधा असर पूरे राज्य के नतीजों की टाइमलाइन पर पड़ेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 21 मई को मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 24 मई 2026 को मतगणना की जाएगी। इसी दिन फलता के साथ-साथ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की भी अंतिम तस्वीर साफ होगी। टीएमसी और भाजपा दोनों ही दलों ने इस सीट पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, क्योंकि यह लड़ाई अब केवल एक सीट की नहीं बल्कि राजनीतिक साख और निष्पक्षता की बन गई है।