ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि अमेरिकी प्रतिनिधि सक्रिय रूप से ईरान के साथ बातचीत में लगे हुए हैं। वहीं अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद जारी है और इसका उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्ष को खत्म करने के रास्ते तलाशना है।
हालांकि, ट्रंप का यह रुख उनके हालिया सख्त बयानों से थोड़ा अलग नजर आता है। इससे पहले उन्होंने ईरान के प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि वह इसे स्वीकार करने लायक नहीं मानते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने अपने कार्यों के लिए अभी तक पर्याप्त जवाबदेही नहीं दिखाई है। इसके बावजूद अब बातचीत को “सकारात्मक” बताना इस बात का संकेत है कि कूटनीति के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
दूसरी ओर, Iran ने भी बातचीत के अगले चरण की तैयारी शुरू कर दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei के अनुसार, उन्हें पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका का जवाब मिल चुका है और फिलहाल उसकी समीक्षा की जा रही है। अंतिम निर्णय के बाद ही तेहरान अपनी औपचारिक प्रतिक्रिया देगा।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसका 14-सूत्रीय प्रस्ताव केवल क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने पर केंद्रित है और इसमें परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा कोई मुद्दा शामिल नहीं है। उनका मुख्य उद्देश्य लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में चल रही हिंसा को रोकना है।
साथ ही, ईरान ने यह भी साफ किया कि वह किसी दबाव या समय सीमा के तहत बातचीत नहीं करेगा। उनके प्रस्ताव के मुताबिक, पहले युद्धविराम होना जरूरी है, उसके बाद अगले 30 दिनों में अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जा सकती है।
कुल मिलाकर, एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी जारी है, वहीं दूसरी ओर संवाद की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या यह बातचीत वाकई क्षेत्र में शांति की दिशा में कोई ठोस परिणाम ला पाती है या नहीं।