OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन का मानना है कि AI नौकरियों को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, बल्कि काम करने के तरीके को बदल देगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) पर कहा कि AI को लेकर जो डर फैलाया जा रहा है, वह “जरूरत से ज्यादा निराशावादी” है।
ऑल्टमैन के मुताबिक, AI का असली मकसद इंसानों को रिप्लेस करना नहीं, बल्कि उनकी क्षमता को बढ़ाना है। यानी आने वाले समय में AI कठिन और दोहराए जाने वाले काम अपने हाथ में ले लेगा, जबकि इंसान ज्यादा क्रिएटिव और रणनीतिक भूमिकाओं में आगे बढ़ेंगे।
हालांकि, यह बयान ऐसे समय आया है जब खासकर अमेरिका में कई कंपनियों में AI के कारण छंटनी की खबरें सामने आ रही हैं। गेमिंग और टेक सेक्टर में इसका असर ज्यादा देखा गया है। उदाहरण के तौर पर King (जो Candy Crush Saga के लिए जानी जाती है) ने उन डेवलपर्स को ही हटा दिया, जिन्होंने AI टूल्स बनाए थे।
दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों की राय इससे अलग है। Dario Amodei जैसे एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में AI खुद ही अधिकतर कोड लिख सकेगा, जिससे पारंपरिक नौकरियों पर असर पड़ सकता है।
लेकिन ऑल्टमैन इस डर को संतुलित नजरिए से देखते हैं। उनका कहना है कि हर तकनीकी बदलाव के साथ नौकरियों का स्वरूप बदलता है—जैसे पहले औद्योगिक क्रांति या इंटरनेट के दौर में हुआ था।
उनके अनुसार, भविष्य में इंसान और AI के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि सहयोग होगा। AI जहां काम को आसान बनाएगा, वहीं इंसान नई स्किल्स सीखकर खुद को बदलते समय के अनुसार ढालेंगे।
कुल मिलाकर, AI का असर जरूर पड़ेगा—लेकिन यह अंत नहीं, बल्कि एक नए दौर की शुरुआत होगी, जहां काम करने का तरीका बदलेगा, मौके बढ़ेंगे और इंसान की भूमिका और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएगी।