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छत्तीसगढ़ में व्यापारियों के लिए नया नियम, अब 24 घंटे में मिलेगा श्रम पहचान नंबर

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छत्तीसगढ़ सरकार ने व्यापार करने की प्रक्रिया को आसान और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के दुकानदारों और व्यापारियों के लिए श्रम पहचान संख्या यानी LIN (Labour Identification Number) लेना अनिवार्य किया जा रहा है। इसके लिए श्रम विभाग ने छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021 में संशोधन का नया प्रारूप जारी किया है।

नए प्रस्तावित नियमों के तहत अब दुकानदारों और संस्थानों को ऑनलाइन आवेदन करने के बाद मात्र 24 घंटे के भीतर श्रम पहचान संख्या का पंजीकरण प्रमाणपत्र मिल सकेगा। सरकार का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और तेज बनाना है, ताकि व्यापारियों को अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

प्रस्तावित नियम 4 के अनुसार, नियोजक को वेब पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा और ई-चालान के माध्यम से निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। आवेदन पूरा होने के 24 घंटे के भीतर सिस्टम के जरिए पंजीकरण प्रमाणपत्र स्वतः जारी कर दिया जाएगा।

श्रम पहचान संख्या प्राप्त करने के लिए दुकानदारों और व्यापारियों को स्वघोषणा देनी होगी। सरकार के अनुसार यह प्रमाणपत्र आवेदन में दी गई जानकारी और अपलोड किए गए दस्तावेजों के आधार पर पूरी तरह सिस्टम जनरेटेड होगा। इसमें किसी भी प्रकार के भौतिक हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर आवेदन में दी गई जानकारी गलत या भ्रामक पाई जाती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी नियोजक की होगी। ऐसे मामलों में कार्रवाई भी की जा सकती है।

नए नियमों के तहत यदि किसी दुकान या संस्थान के मालिक, पते या कर्मचारियों की संख्या में बदलाव होता है, तो व्यापारी 100 रुपए शुल्क देकर ऑनलाइन संशोधन के लिए आवेदन कर सकेंगे। संशोधित प्रमाणपत्र भी 24 घंटे के भीतर जारी किया जाएगा।

इसके अलावा हर दुकान और संस्थान के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह अपने परिसर में पंजीकरण प्रमाणपत्र ऐसी जगह लगाए, जहां उसे आसानी से पढ़ा जा सके। ऑनलाइन जारी की गई श्रम पहचान संख्या को ही कानूनी रूप से वैध माना जाएगा।

नए ‘प्रारूप-2’ के तहत अब कर्मचारियों का विस्तृत विवरण देना भी जरूरी होगा। इसमें नियमित, संविदा, अंशकालिक और प्रशिक्षु कर्मचारियों की संख्या अलग-अलग दर्ज करनी होगी। साथ ही महिला और पुरुष कर्मचारियों का अलग-अलग विवरण भी देना अनिवार्य रहेगा।

विपुल कुमार गुप्ता द्वारा जारी सूचना में कहा गया है कि इन प्रस्तावित नियमों पर प्रभावित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। इच्छुक लोग श्रम विभाग, मंत्रालय महानदी भवन में अपने सुझाव भेज सकते हैं। सुझावों पर विचार के बाद ही नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह पंजीकरण प्रमाणपत्र केवल श्रम विभाग की प्रशासनिक आवश्यकताओं के लिए होगा। इसके आधार पर किसी संपत्ति या व्यवसाय पर मालिकाना हक का दावा नहीं किया जा सकेगा।

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