Meta Pixel

10×26 फीट के शेड में 205 गायें: लाखासार गौधाम की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

Spread the love

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले स्थित लाखासार गौधाम में मवेशियों की बदहाल स्थिति को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। एक छोटे से शेड में 205 गायों को ठूंसकर रखने और बुनियादी सुविधाओं की कमी की खबर सामने आने के बाद अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी है। हाईकोर्ट ने पशुपालन विभाग के सचिव को शपथपत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने गौधाम की स्थिति पर गंभीर नाराजगी जताते हुए सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए। इस मामले की अगली सुनवाई 14 मई को होगी।

दरअसल 3 मई को प्रकाशित एक रिपोर्ट में लाखासार गौधाम की अव्यवस्थाओं को उजागर किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक महज 10×26 फीट के छोटे शेड में 205 गायों को ठूंसकर रखा गया है, जहां पशुओं के बैठने तक की पर्याप्त जगह नहीं है। पशु विशेषज्ञों के अनुसार एक मवेशी के लिए कम से कम 30 से 40 वर्गफुट ढंका हुआ स्थान जरूरी होता है, लेकिन यहां क्षमता से कई गुना ज्यादा पशु रखे गए हैं। इससे दम घुटने और संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है।

यह वही गौधाम है जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 14 मार्च को किया था। बिलासपुर से करीब 18 किलोमीटर दूर तखतपुर ब्लॉक के लाखासार में 25 एकड़ में बने इस गौधाम को गौसंरक्षण और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण भवन निर्माण के लिए 25 लाख रुपए स्वीकृत करने के साथ काऊ कैचर और पशु एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की भी घोषणा की थी।

लेकिन जमीनी स्थिति सरकारी दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। गौधाम में सिर्फ जगह की कमी ही नहीं, बल्कि चारा और पानी का भी गंभीर संकट बताया गया है। जानकारी के अनुसार 200 से ज्यादा मवेशियों के लिए दिनभर में केवल 25 से 30 बोझा पैरा उपलब्ध हो पाता है, जो बेहद कम माना जा रहा है। पशुओं को चारा देने के लिए बना कोटना भी खाली मिला।

स्थिति इतनी खराब है कि 25 एकड़ के विशाल परिसर की देखरेख सिर्फ एक चौकीदार के भरोसे चल रही है। चौकीदार को 12 हजार रुपए मासिक वेतन पर 24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नवजात बछड़ों को उनकी मां से अलग रखा जा रहा है, जिसे पशु कल्याण के लिहाज से गंभीर लापरवाही माना जा रहा है।

गौधाम का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों को सुरक्षित स्थान देना था, लेकिन सकरी, लाखासार और तखतपुर रोड पर अब भी बड़ी संख्या में मवेशी सड़कों पर बैठे नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गौधाम में केवल दान में दिए गए मवेशियों को रखा जा रहा है, जबकि आवारा पशुओं को उनके मालिक वहां भेजने से बच रहे हैं।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब इस मामले में प्रशासन और पशुपालन विभाग पर जवाबदेही बढ़ गई है। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि पशुओं की सुरक्षा और देखभाल में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *