छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC भर्ती घोटाले में आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर को बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपी पर आरोप है कि उसने उम्मीदवारों से लाखों रुपए लेकर उन्हें परीक्षा पास कराने के लिए प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए थे। मामला दर्ज होने के बाद से उत्कर्ष फरार बताया जा रहा है।
CBI जांच में सामने आया है कि रायपुर के शांतिनगर निवासी उत्कर्ष चंद्राकर ने करीब 30 से 35 उम्मीदवारों को प्री और मेंस परीक्षा के लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए थे। जांच एजेंसी के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में कई लोग शामिल थे और उम्मीदवारों से चयन के बदले भारी रकम वसूली गई थी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं मेहनत करने वाले युवाओं के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ हैं। अदालत ने माना कि इस तरह के मामलों में सख्ती जरूरी है, क्योंकि इससे पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
मामले की अहम गवाह सुषमा अग्रवाल ने धारा 164 के तहत दर्ज बयान में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि उत्कर्ष चंद्राकर ने उससे 25 लाख रुपए लिए थे। बयान के मुताबिक 8 मई 2022 को उम्मीदवारों को बस से बारनवापारा रिजॉर्ट ले जाया गया था, जहां उन्हें लीक प्रश्नपत्रों के आधार पर मुख्य परीक्षा की तैयारी करवाई गई।
जांच में यह भी सामने आया कि उम्मीदवारों से चयन के बदले 50 से 60 लाख रुपए तक की मांग की जाती थी। परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को रायपुर के सिद्धि विनायक पैलेस, बारनवापारा रिजॉर्ट और होटल वेंकटेश इंटरनेशनल में ठहराया गया। आरोप है कि प्रारंभिक परीक्षा से एक दिन पहले ही उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र और उसके जवाब दे दिए गए थे। वहीं मुख्य परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के जरिए प्रश्नपत्र मंगवाकर रिजॉर्ट में रुकवाए गए उम्मीदवारों को उत्तर याद करवाए जाते थे।
CBI की जांच में इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड CGPSC के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को बताया गया है, जो फिलहाल जेल में बंद हैं। जांच एजेंसी के अनुसार टामन सिंह ने परीक्षा के प्रश्नपत्र अपने घर पर साहिल, नीतेश, निशा कोसले और दीपा आडिल को उपलब्ध कराए थे। बाद में उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने लीक पेपर बजरंग पावर एंड इस्पात कंपनी के डायरेक्टर श्रवण गोयल तक पहुंचाया। आरोप है कि श्रवण गोयल के बेटे शशांक और बहू भूमिका ने इसी लीक पेपर से तैयारी कर डिप्टी कलेक्टर पद हासिल किया।
जांच में कोलकाता कनेक्शन भी सामने आया है। प्रश्नपत्र छापने का काम कोलकाता की एक प्रिंटिंग कंपनी को दिया गया था। CBI के अनुसार कंपनी कर्मचारी महेश दास प्रश्नपत्र लेकर रायपुर आया था, जहां आरती वासनिक को पर्चे सौंपे गए। इसके बाद टामन सिंह और अन्य लोगों के साथ मिलकर प्रश्नपत्रों की कॉपी की गई और दोबारा सील कर वापस भेज दिया गया।
यह पूरा मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा है। आरोप है कि राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल कर डिप्टी कलेक्टर, DSP और अन्य राजपत्रित पदों पर करीबी लोगों को चयनित कराया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपी थी।
CBI अब तक अपनी अंतिम चार्जशीट में कुल 29 लोगों को आरोपी बना चुकी है। जांच एजेंसी के अनुसार CGPSC 2021 परीक्षा में 171 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी, जिसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई।