सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद खराब साबित हुई। सोमवार को बाजार खुलते ही निवेशकों को बड़ा झटका लगा और कुछ ही मिनटों में शेयर बाजार लाल निशान में डूब गया। भारी बिकवाली के चलते सेंसेक्स 900 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी करीब 275 अंक लुढ़क गया। बाजार की इस तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और ट्रेडिंग फ्लोर पर घबराहट का माहौल देखने को मिला।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,328 अंकों के मुकाबले कमजोर शुरुआत करते हुए 76,638 पर खुला। लेकिन बाजार खुलने के बाद बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ता गया और कुछ ही देर में सेंसेक्स करीब 944 अंक गिरकर 76,363 के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी दबाव में दिखाई दिया। निफ्टी 24,176 के पिछले बंद स्तर से फिसलकर 23,970 पर खुला और शुरुआती कारोबार में 23,895 तक टूट गया।
विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत हैं। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा। भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करते हैं, उनके लिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी आर्थिक दबाव पैदा करती है। यही वजह है कि निवेशकों ने बाजार खुलते ही तेजी से बिकवाली शुरू कर दी।
शुरुआती कारोबार में बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। कई बड़ी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। विदेशी निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक बाजारों में कमजोरी ने घरेलू निवेशकों का भरोसा भी कमजोर कर दिया। ट्रेडर्स और छोटे निवेशकों के बीच डर का माहौल साफ दिखाई दिया।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करेंगी। अगर मिडिल ईस्ट तनाव और बढ़ता है या वैश्विक बाजारों में दबाव बना रहता है तो भारतीय बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और सतर्कता के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है।