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कच्चे तेल और वेस्ट एशिया तनाव ने तोड़ी बाजार की रफ्तार, सेंसेक्स 1300 अंक लुढ़का; निवेशकों में मचा हड़कंप

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भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी तबाही देखने को मिली। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की रफ्तार पर जोरदार ब्रेक लगा दिया। कारोबार के दौरान BSE Sensex 1300 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि NIFTY 50 23800 के करीब पहुंच गया। बाजार में डर का माहौल इतना ज्यादा था कि लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए और निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गए।

कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1319 अंक गिरकर 76008 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 365 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। बाजार में बिकवाली का असर सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्मॉलकैप और मिडकैप कंपनियों में भी भारी दबाव देखने को मिला। सभी 16 सेक्टोरल इंडेक्स नुकसान में बंद हुए, जिससे साफ हो गया कि गिरावट पूरे बाजार में फैली हुई थी।

इस बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल रही। ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव और वेस्ट एशिया में शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता ने सप्लाई संकट की आशंका बढ़ा दी है। यही डर दुनिया भर के बाजारों में दिख रहा है।

तेल की कीमतें बढ़ने का सबसे ज्यादा असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर पड़ा। Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited के शेयर करीब 2 से 3 फीसदी तक टूट गए। निवेशकों को डर है कि महंगा कच्चा तेल कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल सकता है।

ट्रैवल और होटल सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव साफ दिखाई दिया। Indian Hotels Company Limited, Lemon Tree Hotels, Chalet Hotels और IndiGo के शेयरों में 1 से 5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। माना जा रहा है कि अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव और तेल की कीमतें ऐसे ही बढ़ती रहीं तो यात्रा और एविएशन सेक्टर की लागत में और इजाफा हो सकता है।

सबसे ज्यादा झटका ज्वेलरी सेक्टर को लगा। Titan Company, Senco Gold और Kalyan Jewellers के शेयरों में 7 से 11 फीसदी तक की बड़ी गिरावट आई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की खरीद को लेकर हालिया सरकारी अपील और बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता ने इस सेक्टर में निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

इस बीच भारतीय रुपया भी दबाव में आ गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 139 पैसे टूटकर 94.90 के स्तर तक पहुंच गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी। शुक्रवार को ही विदेशी निवेशकों ने 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच दिए थे।

हालांकि इस भारी गिरावट के बीच Hyundai Motor India के शेयरों में तेजी देखने को मिली। कंपनी के बेहतर तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों ने इसमें खरीदारी की, जिससे शेयर करीब 2.6 फीसदी चढ़ गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वेस्ट एशिया का तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में राहत नहीं मिलती, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और दबाव बना रह सकता है।

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