भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई, जिससे निवेशकों के बीच बेचैनी बढ़ गई। शुरुआती कारोबार में ही बाजार लाल निशान में फिसल गया और दोनों प्रमुख इंडेक्स कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का BSE Sensex अपने पिछले बंद 76,015.28 अंक के मुकाबले करीब 327 अंक टूटकर 75,688.39 पर खुला। वहीं NIFTY 50 भी दबाव में दिखा और 23,722.60 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। बाजार की इस अचानक कमजोरी ने छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के ईरान को लेकर दिए गए बयान ने वैश्विक बाजारों में हलचल तेज कर दी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष-विराम फिलहाल “लाइफ सपोर्ट पर” है। इस बयान के बाद दुनिया भर के निवेशकों में डर बढ़ गया कि मध्य पूर्व में तनाव और गहरा सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
इस तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 104 से 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। तेल की कीमतों में इस तेजी ने भारत जैसे तेल आयातक देशों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। निवेशकों को डर है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसका असर सीधे भारतीय बाजार, महंगाई और रुपये पर दिखाई देने लगा है।
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी लगातार दबाव में रहा और कमजोर होकर 95.50 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। रुपये की इस कमजोरी ने विदेशी निवेशकों का भरोसा और कमजोर किया। बाजार में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली भी देखने को मिली, जिसने गिरावट को और तेज कर दिया।
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने 11 मई को करीब 8,438 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। यह हाल के दिनों की सबसे बड़ी बिकवाली में गिनी जा रही है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने करीब 5,940 करोड़ रुपये की खरीदारी करके बाजार को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन वैश्विक दबाव इतना ज्यादा था कि बाजार को पूरी तरह सहारा नहीं मिल सका।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी नीतियों, तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी। फिलहाल बाजार में सावधानी का माहौल बना हुआ है और निवेशक हर छोटी वैश्विक खबर पर नजर रख रहे हैं।