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तेल संकट से बढ़ी भारत की टेंशन! पेट्रोल-डीजल महंगा करने और गोल्ड इम्पोर्ट रोकने की तैयारी में सरकार?

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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने अब भारत की आर्थिक चिंता भी बढ़ा दी है। विदेशी मुद्रा भंडार पर लगातार बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार कई बड़े आर्थिक कदमों पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक सरकार अब गैर-जरूरी आयातों पर नियंत्रण, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और सोने के आयात पर सख्ती जैसे विकल्पों को गंभीरता से देख रही है। इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लगातार दूसरे दिन देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने, सोने की खरीद टालने और विदेशी मुद्रा खर्च कम करने की अपील की है।

जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और Reserve Bank of India के बीच लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। सरकार की कोशिश है कि वैश्विक संकट और तेल बाजार में अस्थिरता का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कम से कम पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो भारत के चालू खाता घाटे और रुपये पर और ज्यादा दबाव बढ़ सकता है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार जिन विकल्पों पर विचार कर रही है, उनमें पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाना भी शामिल है। इसके साथ ही सोना और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे आयातों को गैर-जरूरी श्रेणी में रखकर उन पर नियंत्रण की तैयारी की जा सकती है। सरकार का मानना है कि इन आयातों में कमी लाकर विदेशी मुद्रा की बचत की जा सकती है। हालांकि वित्त मंत्रालय और RBI की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और ऐसे में तेल की कीमतों में हर उछाल का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव और सप्लाई बाधित होने की आशंका ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ऊंचे आयात बिल के कारण डॉलर तेजी से बाहर जा रहा है, जिससे भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच चुका है, जिसने बाजार और निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।

रुपये को संभालने के लिए Reserve Bank of India लगातार बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। 1 मई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 690.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले एक महीने का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा भंडार अभी भी लगभग 10 से 11 महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है, इसलिए तत्काल संकट जैसी स्थिति नहीं है।

इसके अलावा RBI विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी रोकने के लिए भी सख्त कदम उठा सकता है। केंद्रीय बैंक पहले ही बैंकों की दैनिक ओपन पोजिशन लिमिट 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर चुका है। अब आयातकों के लिए करेंसी हेजिंग नियमों में बदलाव और निर्यातकों को डॉलर जल्दी देश में वापस लाने जैसे नए उपायों पर भी चर्चा चल रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 24 घंटों में दो बार देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है। गुजरात में एक जनसभा के दौरान उन्होंने कहा कि सोने के आयात पर देश का पैसा विदेश चला जाता है, इसलिए लोगों को फिलहाल सोने की खरीद टालनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों को ऐसे उत्पादों और गतिविधियों से बचना चाहिए जिनसे विदेशी मुद्रा का अधिक खर्च होता है। इससे पहले भी प्रधानमंत्री ने मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का जिक्र करते हुए आर्थिक अनुशासन की जरूरत पर जोर दिया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले समय में सरकार और RBI दोनों आर्थिक नियंत्रण और विदेशी मुद्रा संरक्षण को लेकर और सख्त कदम उठा सकते हैं। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना दिखाई दे रही है।

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