सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने उतार-चढ़ाव के बीच मजबूत वापसी का संकेत दिया। सुबह बाजार की शुरुआत हल्की कमजोरी के साथ हुई, लेकिन शुरुआती मिनटों में ही निवेशकों की खरीदारी बढ़ने लगी और देखते ही देखते बाजार ने रिकवरी कर ली। कारोबार शुरू होते ही जहां निवेशकों में हल्की सतर्कता दिखाई दी, वहीं कुछ ही देर बाद बाजार में सकारात्मक माहौल बन गया।
BSE Sensex अपने पिछले बंद 74,559.24 अंक के मुकाबले करीब 120 अंक की गिरावट के साथ 74,439.34 पर खुला। वहीं Nifty 50 भी शुरुआती कारोबार में दबाव में नजर आया और 17 अंक टूटकर 23,362.45 पर ओपन हुआ। हालांकि बाजार में यह कमजोरी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी।
सुबह करीब 9:16 बजे तक बाजार का रुख पूरी तरह बदल चुका था। निवेशकों की मजबूत खरीदारी के चलते सेंसेक्स 234.61 अंक यानी 0.31 फीसदी की बढ़त के साथ 74,793.85 तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 83.55 अंक चढ़कर 23,463.10 पर कारोबार करता दिखाई दिया। इस तेजी ने शुरुआती गिरावट को पूरी तरह खत्म कर दिया और बाजार फिर से हरे निशान में लौट आया।
आज के कारोबार में सबसे ज्यादा चमक मेटल सेक्टर में देखने को मिली। निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.31 फीसदी तक उछल गया, जिससे साफ संकेत मिला कि निवेशकों का रुझान मेटल कंपनियों की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा फार्मा, ऑयल एंड गैस, एफएमसीजी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बाजार में चौतरफा खरीदारी से निवेशकों का भरोसा मजबूत होता नजर आया।
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने भारतीय बाजार को सहारा दिया है। इसके साथ ही ग्लोबल निवेशकों की धारणा में सुधार और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता भी बाजार के लिए राहत का कारण बनी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी बाजार, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और कच्चे तेल की चाल पर बनी रहेगी।
करेंसी मार्केट में भी भारतीय रुपये ने हल्की मजबूती दिखाई। बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.60 पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 95.63 पर बंद हुआ था। शुरुआती कारोबार में रुपये में करीब 3 पैसे की मजबूती दर्ज की गई, जिसे विदेशी निवेश प्रवाह और बाजार की सकारात्मक धारणा से जोड़कर देखा जा रहा है।
शेयर बाजार की इस रिकवरी ने एक बार फिर संकेत दिया है कि निवेशकों का भरोसा अभी भी बरकरार है और बाजार में हर गिरावट पर खरीदारी देखने को मिल रही है। अब आगे बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी।