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अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारत का बड़ा आर्थिक प्लान, विदेशी निवेश बढ़ाने और आयात घटाने पर फोकस

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India की अर्थव्यवस्था को वैश्विक संकटों से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा रणनीतिक प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है। अमेरिका-ईरान युद्ध, महंगे कच्चे तेल और बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO अब कई बड़े आर्थिक कदमों पर काम कर रहा है। सरकार का मुख्य फोकस विदेशी निवेश बढ़ाने, निर्यात को मजबूत करने और गैर-जरूरी आयात घटाने पर है, ताकि महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपए पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित किया जा सके।

सूत्रों के मुताबिक Prime Minister’s Office विभिन्न मंत्रालयों के साथ लगातार बैठकों के जरिए नई आर्थिक संभावनाओं की पहचान कर रहा है। वहीं वित्त मंत्रालय विदेशी निवेश को आसान बनाने के लिए FEMA यानी Foreign Exchange Management Act से जुड़े नियमों को सरल करने की तैयारी में जुटा हुआ है। सरकार चाहती है कि विदेशी कंपनियों और निवेशकों के लिए भारत में निवेश करना पहले से ज्यादा आसान और आकर्षक बने।

इसके साथ ही भारत अपने द्विपक्षीय निवेश समझौतों को भी नए सिरे से मजबूत करने की योजना बना रहा है। सरकार का मानना है कि वैश्विक संकट के बीच भारत विदेशी निवेशकों के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद बाजार के रूप में उभर सकता है। इसी दिशा में NITI Aayog और वित्त मंत्रालय अलग-अलग स्तर पर अध्ययन कर रहे हैं कि ईरान संकट और महंगे कच्चे तेल का भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ सकता है।

सरकार को सबसे ज्यादा चिंता बढ़ते व्यापार घाटे और चीन पर निर्भरता को लेकर है। आंकड़ों के अनुसार पेट्रोलियम और रत्न-ज्वेलरी को छोड़कर भारत का सालाना व्यापार घाटा लगभग 140 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। इसे कम करने के लिए सरकार चीन से आने वाले सस्ते आयात की जगह घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है।

वाणिज्य मंत्रालय उन सेक्टरों पर विशेष ध्यान दे रहा है जहां भारत अपनी उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ा सकता है। पुराने अध्ययनों में ऐसे 327 उत्पादों की पहचान की गई थी जिनमें चीन से आयात कम किया जा सकता है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, केमिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रमुख हैं। सरकार अब इन क्षेत्रों में स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहित करने की रणनीति पर काम कर रही है।

इसके साथ ही सरकार निर्यात बढ़ाने के लिए पुराने मुक्त व्यापार समझौतों यानी FTA का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। कमजोर रुपए का फायदा उठाकर भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश की जा रही है।

दूसरी तरफ गैर-जरूरी आयातों पर सख्ती बढ़ाई जा रही है। खासकर सोना, बुलियन और ज्वेलरी के आयात को नियंत्रित करने के लिए सरकार पहले ही बड़ा कदम उठा चुकी है। हाल ही में सोना और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी गई है। इसके अलावा सरकार गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को फिर से मजबूत करने पर भी विचार कर रही है ताकि घरेलू सोने को बाजार में लाया जा सके और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो।

सरकार की सबसे बड़ी चिंता चालू खाता घाटा और रुपए में गिरावट को लेकर है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 तक भारत का चालू खाता घाटा GDP के 1.5% से 2.4% तक पहुंच सकता है, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह केवल 0.6% था। वहीं International Monetary Fund यानी IMF ने भी अनुमान जताया है कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.5% तक रह सकती है।

ऐसे में केंद्र सरकार अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर नई रणनीति तैयार कर रही है, ताकि वैश्विक संकटों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा जा सके और विकास की रफ्तार बरकरार रहे।

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