Credit Score को लेकर अक्सर लोगों की यह धारणा होती है कि अगर वे अपना लोन समय से पहले चुका देंगे तो उनका क्रेडिट स्कोर तेजी से बेहतर हो जाएगा। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविकता इससे थोड़ी अलग है। लोन जल्दी चुकाना आर्थिक रूप से समझदारी भरा फैसला जरूर माना जाता है, लेकिन कई मामलों में इसका असर क्रेडिट स्कोर पर भी दिखाई दे सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, क्रेडिट स्कोर सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपने कर्ज समय पर चुकाया या नहीं, बल्कि यह भी देखा जाता है कि आपने कितने लंबे समय तक और कितनी जिम्मेदारी से क्रेडिट को मैनेज किया। यही कारण है कि कई बार लोन समय से पहले बंद करने के बाद स्कोर में हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है।
क्रेडिट स्कोर तय करने में क्रेडिट हिस्ट्री की बड़ी भूमिका होती है। अगर कोई पुराना लोन लंबे समय से चल रहा हो और उसे अचानक क्लोज कर दिया जाए, तो एक्टिव क्रेडिट हिस्ट्री छोटी हो सकती है। इससे औसत अकाउंट एज घट जाती है, जिसका सीधा असर स्कोर पर पड़ सकता है। बैंक और वित्तीय संस्थान लंबे समय तक जिम्मेदारी से चलाए गए क्रेडिट अकाउंट को सकारात्मक संकेत मानते हैं।
इसके अलावा क्रेडिट मिक्स भी एक अहम फैक्टर माना जाता है। वित्तीय संस्थाएं यह देखती हैं कि ग्राहक अलग-अलग तरह के कर्ज जैसे होम लोन, ऑटो लोन और क्रेडिट कार्ड को किस तरह संभालता है। अगर कोई व्यक्ति अपना बड़ा लोन जल्दी बंद कर देता है, तो उसके क्रेडिट पोर्टफोलियो की विविधता कम हो सकती है। इससे भी स्कोर पर हल्का असर पड़ सकता है।
जब तक कोई लोन एक्टिव रहता है, तब तक हर महीने EMI भुगतान की जानकारी क्रेडिट रिपोर्ट में जुड़ती रहती है। यह लगातार एक पॉजिटिव रिकॉर्ड तैयार करती है और स्कोर मजबूत बनाने में मदद करती है। लेकिन जैसे ही लोन बंद होता है, यह एक्टिव रिपोर्टिंग भी रुक जाती है। जिन लोगों के पास सीमित क्रेडिट अकाउंट होते हैं, उनके स्कोर में यह बदलाव ज्यादा साफ दिखाई दे सकता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि लोन बंद करने का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर कोई व्यक्ति नया लोन लेने की योजना बना रहा हो और उससे ठीक पहले पुराना लोन क्लोज कर दे, तो स्कोर में आई छोटी गिरावट भी बैंक की ओर से मिलने वाली ब्याज दर को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि जल्दी लोन चुकाना गलत फैसला है। समय से पहले लोन क्लोज करने से ब्याज का बोझ कम होता है, आर्थिक दबाव घटता है और भविष्य की फाइनेंशियल प्लानिंग आसान हो जाती है। लेकिन किसी भी फैसले से पहले सिर्फ EMI बचत ही नहीं, बल्कि क्रेडिट स्कोर और आने वाली वित्तीय जरूरतों को भी ध्यान में रखना जरूरी माना जाता है।