देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर हुए पेपर लीक मामले में अब ऐसे खुलासे हो रहे हैं जिसने पूरे देश को हिला दिया है। जांच एजेंसियों की पड़ताल में सामने आया है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला एक बड़ा संगठित सिंडिकेट था, जिसने परीक्षा से कई सप्ताह पहले ही प्रश्नपत्र हासिल कर लिया था। राजस्थान एसओजी की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि लीक हुआ पेपर राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, केरल और उत्तराखंड समेत 10 राज्यों तक बेचा गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब Central Bureau of Investigation को सौंप दी गई है। एजेंसी ने दो दर्जन से अधिक लोगों को रडार पर लिया है और कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है। शुरुआती जांच में यह साफ हुआ है कि पूरा खेल परीक्षा से दो से तीन सप्ताह पहले ही शुरू हो चुका था।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक पेपर महाराष्ट्र के नासिक स्थित प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ। वहां से यह प्रश्नपत्र गुरुग्राम के खुरमपुर गांव निवासी एमबीबीएस छात्र यश यादव तक पहुंचा। आरोप है कि यश ने अपने नेटवर्क के जरिए इस पेपर को अलग-अलग राज्यों में फैलाया। खुलासा हुआ है कि 27 अप्रैल को मांगीलाल और दिनेश बिंवाल ने यह पेपर करीब 30 लाख रुपये में खरीदा था, जिसके बाद इसे छात्रों तक पहुंचाने का खेल शुरू हुआ।
इस घोटाले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि आरोपियों के परिवार के चार बच्चों का चयन एक साथ साल 2024 की नीट परीक्षा में हुआ। अब CBI इस पूरे कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही है कि आखिर इतनी बड़ी सफलता के पीछे क्या पेपर लीक का सीधा फायदा दिया गया था।
जांच में यह भी सामने आया है कि सीकर के कई कोचिंग संस्थानों के छात्रों को यह पेपर “गैस पेपर” बताकर बेचा गया। छात्रों से कहा गया कि परीक्षा में आने वाले लगभग सभी सवाल इसी सेट से होंगे। इसके लिए 29 अप्रैल को सीकर में कई छात्रों और अभिभावकों से संपर्क किया गया और दो लाख से पांच लाख रुपये तक की डील की गई।
इस पूरे नेटवर्क में राजनीति और स्थानीय सिस्टम की भी एंट्री सामने आई है। गिरफ्तार आरोपियों में दिनेश बिंवाल का नाम भी शामिल है, जो जयपुर जिला भाजपा का पूर्व मंत्री रह चुका है। जांच एजेंसियों को शक है कि ई-मित्र संचालकों, प्राइवेट कोचिंग संचालकों और करियर काउंसलरों की मदद से पेपर छात्रों तक पहुंचाया गया। यही वजह है कि अब कई स्थानीय नेटवर्क और एजेंट भी जांच के घेरे में आ गए हैं।
एसओजी की रिपोर्ट के बाद अब सीबीआई ने जांच की पूरी कमान संभाल ली है। कई दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक सबूत और हिरासत में लिए गए लोगों को एजेंसी को सौंप दिया गया है। जयपुर से अब तक चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। सबसे बड़ा खुलासा यह है कि राजस्थान इस पूरे पेपर लीक कांड का मूल केंद्र नहीं था, बल्कि यहां से केवल पेपर को आगे बेचने और नेटवर्क फैलाने का काम किया गया।
देशभर में लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर सीबीआई जांच पर टिकी हुई है कि आखिर इस करोड़ों के खेल का मास्टरमाइंड कौन है और कितने बड़े स्तर तक यह नेटवर्क फैला हुआ था।