देश के खिलाड़ियों को ओलिंपिक स्तर की ट्रेनिंग देने और खेल प्रतिभाओं को आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए बनाए गए National Sports Development Fund यानी NSDF को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। एक रिपोर्ट के अनुसार खिलाड़ियों के लिए निर्धारित करोड़ों रुपये का इस्तेमाल दिल्ली के पॉश इलाकों में रहने वाले बड़े अफसरों और ब्यूरोक्रेट्स की खेल सुविधाएं विकसित करने में किया गया।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिस फंड से खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी कराई जानी थी, उसी पैसे से लुटियंस दिल्ली और न्यू मोती बाग जैसे वीआईपी इलाकों में टैम्परेचर कंट्रोल्ड स्विमिंग पूल, टेनिस कोर्ट और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तैयार किए गए।
NSDF की स्थापना 1998 में खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता और खेल विकास के उद्देश्य से की गई थी। इसी फंड से Target Olympic Podium Scheme जैसी योजनाएं भी संचालित होती हैं, जिनका मकसद ओलिंपिक मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को तैयार करना है।
रिपोर्ट के मुताबिक 2021 से 2025 के बीच करीब 6.7 करोड़ रुपये मंजूर किए गए, जिनमें से 6.2 करोड़ रुपये सिविल सर्विस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट, सिविल सर्विसेज कल्चरल एंड स्पोर्ट्स बोर्ड और न्यू मोती बाग रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में खर्च किए गए। इतना ही नहीं, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की RSS से जुड़ी संस्थाओं और कुछ विदेशी क्रिकेट बोर्ड्स तक को भी इस फंड से सहायता दी गई।
दस्तावेजों के अनुसार 2024 में न्यू मोती बाग रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन को खेल सुविधाओं के अपग्रेड के लिए 2.2 करोड़ रुपये का अनुदान मंजूर किया गया। इसके बाद 2024-25 में 1.1 करोड़ और 2025-26 में 88 लाख रुपये की दूसरी किस्त जारी की गई, जबकि उसी दौरान NSDF में आने वाला डोनेशन लगातार घट रहा था।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इससे पहले 2019 में भी खेलो इंडिया योजना के तहत न्यू मोती बाग कॉम्प्लेक्स में खेल सुविधाओं के विकास के लिए 2.8 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। इसके बावजूद पांच साल बाद उन्हीं हार्ड कोर्ट्स को दोबारा अपग्रेड किया गया।
रिकॉर्ड्स बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में NSDF के जरिए खेल ढांचे, उपकरण और खेल प्रोत्साहन के नाम पर करीब 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जारी की गई। इसमें से एक बड़ा हिस्सा अफसरों से जुड़ी संस्थाओं और रिहायशी परिसरों में खर्च हुआ।
संसद की एक स्थायी समिति ने अगस्त 2025 में इस पर नाराजगी भी जताई थी। समिति ने साफ कहा था कि खिलाड़ियों के लिए बनाए गए फंड का इस्तेमाल अधिकारियों की कॉलोनियों और उनके संगठनों पर नहीं होना चाहिए। बावजूद इसके अनुदान जारी रहने पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस मामले पर न्यू मोती बाग RWA के अध्यक्ष सुधांशु पांडे ने कहा कि ये सुविधाएं फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई हैं और पैसा कहां से आएगा, यह सरकार तय करती है। वहीं खेल अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्सपेयर्स का पैसा खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और खेल विकास पर खर्च होना चाहिए, न कि नौकरशाहों की लाइफस्टाइल सुधारने पर।
अब इस खुलासे के बाद खेल फंड के इस्तेमाल और सरकारी जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर खिलाड़ियों के नाम पर मिलने वाला पैसा खिलाड़ियों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा।