दिल्ली के चर्चित Red Fort area blast case मामले में National Investigation Agency ने बड़ा कदम उठाते हुए पटियाला हाउस कोर्ट में 7,500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी ने इस मामले में 10 आरोपियों को नामजद किया है। चार्जशीट में 169 ऑपरेटिव पेज, सैकड़ों दस्तावेज, फॉरेंसिक रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक सबूत शामिल किए गए हैं।
यह मामला पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए कार धमाके से जुड़ा है, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। NIA का दावा है कि इस हमले के पीछे Ansar Ghazwat-ul-Hind नामक आतंकी संगठन का हाथ था, जिसे अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट से जुड़ा बताया गया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपियों ने “ऑपरेशन हेवेनली हिंद” नाम से भारत सरकार को अस्थिर करने और देश में शरिया कानून लागू करने की साजिश रची थी। NIA ने दावा किया कि साल 2022 में श्रीनगर में एक गुप्त बैठक के दौरान “AGuH Interim” नामक आतंकी मॉड्यूल तैयार किया गया था। अफगानिस्तान पहुंचने की योजना असफल होने के बाद यह मॉड्यूल भारत में आतंकी गतिविधियां फैलाने के लिए सक्रिय हुआ।
चार्जशीट में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इस मॉड्यूल में कुछ डॉक्टर और उच्च शिक्षित प्रोफेशनल्स भी शामिल थे। जांच एजेंसी का कहना है कि ये लोग कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर आतंकी गतिविधियों में शामिल हुए।
मुख्य आरोपी Umar-un-Nabi को बताया गया है, जो पुलवामा का रहने वाला था और धमाके के समय कार में मौजूद था। विस्फोट में उसकी मौत हो चुकी है। उमर हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुका था। उसके अलावा आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉक्टर मुजामिल शकील, डॉक्टर आदिल अहमद राथर, डॉक्टर शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, शोएब, डॉक्टर बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार के नाम भी चार्जशीट में शामिल किए गए हैं।
NIA के अनुसार आरोपियों ने TATP जैसे बेहद खतरनाक विस्फोटक तैयार किए थे, जिनका इस्तेमाल दिल्ली धमाके में किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि मॉड्यूल ने AK-47, क्रिंकोव राइफल और देसी पिस्टल जैसे हथियार जमा किए थे। इसके अलावा ड्रोन और रॉकेट के जरिए IED हमलों की टेस्टिंग भी की जा रही थी।
जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपियों का मकसद केवल एक धमाका करना नहीं था, बल्कि देशभर में बड़ा आतंकी नेटवर्क खड़ा करना था। इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक फरार आरोपी की तलाश अभी भी जारी है।
चार्जशीट में 588 गवाहों के बयान, 395 दस्तावेज और 200 से ज्यादा फॉरेंसिक व इलेक्ट्रॉनिक सबूत शामिल किए गए हैं। जांच छह राज्यों तक फैली और फरीदाबाद व जम्मू-कश्मीर से कई अहम सुराग मिले।