भारत का व्यापार घाटा अप्रैल 2026 में बढ़कर 28.38 अरब डॉलर पहुंच गया है। मार्च महीने में यह आंकड़ा 20.67 अरब डॉलर था। आयात में तेज बढ़ोतरी की वजह से व्यापार घाटे में इजाफा देखने को मिला, लेकिन इसके बीच राहत की बड़ी खबर यह रही कि देश के निर्यात यानी एक्सपोर्ट में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार के मुताबिक अप्रैल का एक्सपोर्ट प्रदर्शन पिछले 10 वर्षों के सबसे मजबूत मासिक आंकड़ों में शामिल हो गया है।
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 43.56 अरब डॉलर रहा, जबकि मार्च में यह 38.92 अरब डॉलर था। दूसरी ओर आयात भी तेजी से बढ़कर 71.94 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो मार्च में 59.59 अरब डॉलर था। आयात ज्यादा बढ़ने की वजह से व्यापार घाटा बढ़ा, लेकिन एक्सपोर्ट ग्रोथ ने अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा दिया।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सालाना आधार पर अप्रैल में माल निर्यात में 13.78 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं मर्चेंडाइज इंपोर्ट में भी 10.03 प्रतिशत का इजाफा हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का एक्सपोर्ट सेक्टर मजबूती दिखा रहा है, जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
सिर्फ सामान ही नहीं, बल्कि सेवा क्षेत्र ने भी शानदार प्रदर्शन किया। अप्रैल में सर्विस एक्सपोर्ट बढ़कर 37.24 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 32.85 अरब डॉलर था। वहीं सर्विस इंपोर्ट 16.66 अरब डॉलर दर्ज किया गया। अगर वस्तुओं और सेवाओं दोनों को मिलाकर देखा जाए, तो अप्रैल में भारत का कुल निर्यात 80.80 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 13.59 प्रतिशत अधिक है। कुल आयात 88.61 अरब डॉलर रहा। हालांकि राहत की बात यह रही कि कुल व्यापार घाटा घटकर 7.81 अरब डॉलर पर आ गया, जबकि पिछले साल यह 11.16 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम और पोल्ट्री सेक्टर ने एक्सपोर्ट ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान दिया। पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 34.66 प्रतिशत बढ़कर 9.59 अरब डॉलर पहुंच गया। वहीं इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात 40.31 प्रतिशत उछलकर 5.18 अरब डॉलर हो गया। इंजीनियरिंग गुड्स एक्सपोर्ट भी 8.76 प्रतिशत बढ़कर 10.35 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। इस सेक्टर में 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं दवा और फार्मा सेक्टर का निर्यात 7.12 प्रतिशत बढ़कर 2.66 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि पश्चिम एशिया के साथ व्यापार में गिरावट देखने को मिली। अप्रैल में इस क्षेत्र को भारत का निर्यात 28 प्रतिशत घट गया, जबकि वहां से आयात में भी 30 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
सोना और चांदी पर बढ़ाई गई आयात ड्यूटी का असर भी अब दिखाई देने लगा है। अप्रैल में गोल्ड इंपोर्ट 5.63 अरब डॉलर रहा, जो पिछले महीने की तुलना में 84 प्रतिशत ज्यादा है। सरकार का मानना है कि ऊंची ड्यूटी की वजह से सोने की खपत आधारित मांग में आने वाले समय में कमी आ सकती है।
इसके अलावा चीन, रूस, ओमान, पेरू और Saudi Arabia से आयात में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर एक्सपोर्ट की यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिल सकता है। हालांकि बढ़ते आयात और वैश्विक बाजार की अनिश्चितताएं अभी भी सरकार के लिए चुनौती बनी हुई हैं।