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महंगाई की मार अब ब्रेड पर भी, आम आदमी की थाली से लेकर जेब तक बढ़ा दबाव

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देश में लगातार बढ़ रही महंगाई ने अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को और मुश्किल बना दिया है। पेट्रोल-डीजल, दूध और गैस के बाद अब ब्रेड जैसी रोज इस्तेमाल होने वाली चीज भी महंगी हो गई है। मुंबई समेत कई शहरों में लोकप्रिय ब्रेड कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे आम उपभोक्ताओं का घरेलू बजट और बिगड़ने लगा है।

जानकारी के मुताबिक कई ब्रेड ब्रांड्स ने प्रति पैकेट 2 से 5 रुपये तक दाम बढ़ाए हैं। सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है जिनके घरों में ब्रेड रोजाना नाश्ते का हिस्सा होती है। बाजार में अब 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड 40 रुपये की जगह 45 रुपये में बिक रही है। वहीं होल व्हीट और मल्टीग्रेन ब्रेड के दाम भी 5 रुपये तक बढ़ गए हैं।

बेकरी कारोबारियों का कहना है कि ब्रेड बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमत लगातार बढ़ रही है। खासतौर पर प्लास्टिक पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन और पेट्रोलियम से जुड़े उत्पादों की लागत तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा विदेशों से आने वाले पैकेजिंग मटेरियल पर भी महंगाई का असर पड़ा है। रुपये की कमजोरी के कारण आयात महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर अब खाने-पीने की चीजों पर दिखाई दे रहा है।

व्यापारियों के मुताबिक पहले कंपनियां कीमतों में मामूली बढ़ोतरी करती थीं, लेकिन अब लागत इतनी बढ़ चुकी है कि सीधे 5 रुपये तक दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। छोटे बेकरी संचालकों का कहना है कि अगर कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं तो कारोबार चलाना मुश्किल हो जाता।

इंडिया बेकर्स एसोसिएशन से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि केवल पैकेजिंग ही नहीं बल्कि नमक, प्रिजर्वेटिव, डीजल और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी काफी बढ़ चुका है। यही वजह है कि अब ब्रेड निर्माण की लागत पहले के मुकाबले काफी ज्यादा हो गई है।

उधर आम ग्राहक लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। लोगों का कहना है कि हर महीने किसी न किसी जरूरी चीज के दाम बढ़ जाते हैं। पहले जहां कुछ रुपये की बढ़ोतरी होती थी, अब सीधे 5 रुपये तक कीमत बढ़ रही है, जिससे रसोई का पूरा बजट प्रभावित हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन और कच्चे माल की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में अन्य खाद्य उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में महंगाई का दबाव और ज्यादा बढ़ने की आशंका है।

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