छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। मंगलवार से तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 90-90 पैसे प्रति लीटर की नई बढ़ोतरी कर दी है। इससे पहले सिर्फ चार दिन पहले ही दोनों ईंधनों के दाम में 3-3 रुपए प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई थी। लगातार दूसरी बार हुई इस बढ़ोतरी का असर अब सीधे लोगों की जेब और रसोई दोनों पर पड़ने वाला है।
नई कीमतों के बाद रायपुर में पेट्रोल 104 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गया है, जबकि डीजल करीब 97 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। बढ़ती ईंधन कीमतों का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों पर भी दिखाई देगा। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल, राशन और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं।
डीजल महंगा होने से खेती-किसानी पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है। ट्रैक्टर, पंपिंग सेट और कृषि उपकरणों की संचालन लागत बढ़ने से किसानों की परेशानी बढ़ सकती है। वहीं आने वाले दिनों में बस, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
पिछली कीमत वृद्धि के दौरान रायपुर समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई थी। सप्लाई को लेकर फैली अफवाहों के कारण लोगों ने जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल भरवाना शुरू कर दिया था। कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई थीं और कुछ जगहों पर ईंधन खत्म होने जैसी स्थिति भी बन गई थी। हालांकि फिलहाल सप्लाई सामान्य बताई जा रही है।
बढ़ती कीमतों और संभावित ब्लैक मार्केटिंग को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हो गया है। रायपुर कलेक्टर ने पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। अगर कहीं अधिक कीमत वसूली या अवैध बिक्री की शिकायत मिलती है तो लोग 9977222564, 9977222574, 9977222584 और 9977222594 पर सूचना दे सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे भारतीय तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले दिनों में ईंधन के दाम और बढ़ सकते हैं।
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, रिफाइनिंग खर्च, एक्साइज ड्यूटी, वैट और डीलर कमीशन को जोड़ने के बाद पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत तय होती है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में ईंधन की कीमतें अलग दिखाई देती हैं।