Vishnu Deo Sai ने सुशासन तिहार के दौरान प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा संदेश दिया है। चिरमिरी में आयोजित एमसीबी, कोरिया और सूरजपुर जिलों की संयुक्त समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की और किसानों से जुड़े मामलों में लापरवाही सामने आने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दे दिए। बैठक के दौरान खाद वितरण में गंभीर गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर सहायक पंजीयक सहकारिता आयुष प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया गया। इसके साथ ही अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
चिरमिरी स्थित एसईसीएल के तानसेन भवन में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों से लेकर पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और राजस्व मामलों तक हर विभाग की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री का फोकस साफ था कि जनता से जुड़े मुद्दों में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
किसानों को लेकर मुख्यमंत्री ने बेहद कड़ा संदेश दिया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी से जुड़े मामलों में लापरवाही सीधे किसानों के भविष्य को प्रभावित करती है, इसलिए किसी भी अधिकारी की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने नई सहकारी समितियों को सक्रिय बनाए रखने और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम किसान तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।
भीषण गर्मी और जल संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पेयजल व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों की जवाबदेही तय की। उन्होंने ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जरूरत पड़ने पर टैंकर खरीदने और दूसरे जिलों से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने को कहा गया। बरसात से पहले जल स्रोतों में क्लोरीन डालने के निर्देश भी दिए गए ताकि मौसमी बीमारियों को रोका जा सके।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सख्त चेतावनी दी। उन्होंने अधिकारियों से साफ कहा कि सड़क, भवन और अन्य विकास कार्यों में किसी भी प्रकार का घटिया निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी दबाव में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई तय होनी चाहिए।
बरसात के मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही मातृ मृत्यु दर कम करने और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधूरे आवासों को जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए। लंबित राजस्व मामलों के त्वरित निराकरण और शिविरों की संख्या बढ़ाने को भी कहा गया। सेवा सेतु अभियान के तहत लंबित जाति प्रमाणपत्र मामलों की समीक्षा करते हुए उन्होंने प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान एमसीबी जिले की शिक्षा व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए और स्कूलों की स्थिति में जल्द सुधार दिखना चाहिए।
स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोयला खदानों और औद्योगिक परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। वहीं वन विभाग को सड़क, बिजली और सिंचाई परियोजनाओं के लिए समय पर अनुमति देने के निर्देश भी दिए गए ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों।
इस समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री Shyam Bihari Jaiswal, विधायक Bhaiya Lal Rajwade, जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंती सिंह, महापौर रामनरेश राय, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव रजत बंसल समेत तीनों जिलों के कलेक्टर, एसपी और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सुशासन तिहार के मंच से मुख्यमंत्री साय का यह सख्त संदेश अब पूरे प्रशासनिक अमले के लिए चेतावनी माना जा रहा है कि जनता और किसानों से जुड़े मामलों में लापरवाही करने वालों पर सरकार अब सीधे कार्रवाई करने के मूड में है।