रायपुर कमिश्नरेट पुलिस ने आईपीएल सीजन के दौरान चल रहे एक बड़े ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए देश के कई राज्यों में दबिश देकर 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट ने इस कार्रवाई को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बताया है। रायपुर, भिलाई, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़ और बालोद समेत कई शहरों से जुड़े सटोरियों का नेटवर्क हरियाणा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार तक फैला हुआ था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 18 लाख रुपए नकद और लगभग 50 लाख रुपए का इलेक्ट्रॉनिक व अन्य सामान जब्त किया है।
जानकारी के मुताबिक आईपीएल शुरू होते ही ऑनलाइन सट्टेबाजी का यह नेटवर्क अमरबेल की तरह फैल गया था। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में संचालित हो रहे क्रिकेट सट्टा पैनलों की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और पूर्व में गिरफ्तार सटोरियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं। इसके बाद रायपुर पुलिस की विशेष टीम ने कई राज्यों में दबिश देकर पांच बड़े पैनलों को ध्वस्त कर दिया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार अलग-अलग थानों में दर्ज 18 मामलों की जांच के दौरान अब तक कुल 14 पैनलों को तोड़ा जा चुका है। इस पूरे ऑपरेशन में सौ से ज्यादा सटोरियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने अब तक करीब एक करोड़ रुपए नकद और साढ़े तीन करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की है। आईपीएल सीजन खत्म होने से पहले यह कार्रवाई सट्टा कारोबारियों के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।
पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। ऑनलाइन एप, मोबाइल नंबर, बैंक खातों और पेमेंट गेटवे के जरिए करोड़ों का लेन-देन किया जा रहा था। पहली बार रायपुर पुलिस ने सट्टा नेटवर्क से जुड़े पेमेंट गेटवे सिस्टम पर भी कार्रवाई की है। इससे यह साफ हो गया कि सटोरिए सिर्फ फोन और व्हाट्सएप तक सीमित नहीं थे बल्कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल कर हाईटेक तरीके से सट्टा चला रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया कि जैसे ही किसी पैनल पर पुलिस कार्रवाई की भनक लगती थी, पूरा नेटवर्क तुरंत दूसरे नाम से सक्रिय हो जाता था। कई बार सटोरिए अपने खिलाड़ियों और एजेंटों को किसी दूसरे पैनल में शिफ्ट कर देते थे। पैनल का नाम बदलकर नया नेटवर्क तैयार कर लिया जाता था ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके। यही वजह है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी पर पूरी तरह अंकुश लगाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
पुलिस ने जिन बड़े पैनलों पर कार्रवाई की है उनमें मंजीत सिंह और मोहिस सोमानी ग्रुप, बाबू खेमानी ग्रुप, नमन जग्गी और आयुष जैन ग्रुप, अमित जंघेल ग्रुप, सोनू फतनानी ग्रुप, अमन नत्थानी ग्रुप, हर्ष नागदेव ग्रुप, हरीश नायक ग्रुप और लक्ष्मण-आशीष जाधव ग्रुप शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं आईपीएल शुरू होने से पहले भी राखब देव पाहूजा, रितेश गोविंदानी, आकाश तांडी, प्रतीक वाधवानी और धर्मेंद्र पोहानी जैसे नेटवर्क पुलिस के निशाने पर आ चुके हैं।
तेलीबांधा थाना क्षेत्र से जुड़े मामले में हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कई आरोपियों को पकड़ा गया है। वहीं न्यू राजेंद्र नगर क्षेत्र में झारखंड और भिलाई तक फैले नेटवर्क का खुलासा हुआ। तिल्दा नेवरा और मौदहापारा क्षेत्रों में भी अलग-अलग सट्टा मॉड्यूल संचालित किए जा रहे थे, जिनके ऑपरेटरों को गिरफ्तार किया गया है।
रायपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा अब लोकल स्तर का अपराध नहीं रह गया है, बल्कि यह अंतरराज्यीय नेटवर्क में बदल चुका है। आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट के दौरान करोड़ों रुपए का अवैध कारोबार डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े फाइनेंसर, तकनीकी सहयोगियों और हवाला कनेक्शन की भी जांच कर रही है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।