भीषण गर्मी से झुलस रहा छत्तीसगढ़ अब अगले दो दिन और तपने वाला है। मौसम विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि रायपुर समेत प्रदेश के कई मध्य इलाकों में हीटवेव का असर जारी रहेगा। आसमान से बरसती आग और चलती गर्म हवाओं ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। दुर्ग प्रदेश का सबसे गर्म जिला बन गया है, जहां तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 26 डिग्री दर्ज किया गया।
हालांकि राहत की खबर भी सामने आई है। मौसम विभाग के मुताबिक 29 मई से प्रदेश के मौसम में बदलाव शुरू हो सकता है। तेज आंधी, गरज-चमक और हल्की बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान 2 से 4 डिग्री तक गिर सकता है, जिससे लोगों को झुलसाती गर्मी से थोड़ी राहत मिलेगी।
बुधवार को रायपुर में मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी के कारण देवपुरी इलाके में बिजली का पोल गिर गया। वहीं दूसरी तरफ भीषण गर्मी का असर सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहा। खैरागढ़ के दल्लीखोली-लछना जंगल में लू की चपेट में आने से मोर, सिवेट समेत कई वन्यजीवों की मौत हो गई। कांकेर के सरोना इलाके में भी सैकड़ों चमगादड़ों के मरने की खबर ने वन विभाग और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और हल्की बारिश होने की संभावना जताई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर-पश्चिम ओडिशा के आसपास बने ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण और सक्रिय ट्रफ लाइन का असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। यही सिस्टम प्रदेश में आंधी और बारिश की गतिविधियों को बढ़ा रहा है।
राजधानी रायपुर में आज भी हीटवेव का अलर्ट जारी है। यहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री और न्यूनतम तापमान करीब 29 डिग्री रहने का अनुमान है। दोपहर के समय लोगों को बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
भीषण गर्मी को देखते हुए मौसम विभाग और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। नौतपा के दौरान लू लगने का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। शरीर का कूलिंग सिस्टम प्रभावित होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों ने ज्यादा से ज्यादा पानी पीने, धूप में निकलने से बचने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी है।
किसानों के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि रबी मक्का, केला और पपीता जैसी फसलों में हल्की सिंचाई करते रहें ताकि तेज गर्मी से नुकसान कम हो सके। साथ ही गेहूं और चना की कटाई जल्द पूरी कर सुरक्षित जगहों पर भंडारण करने की सलाह दी गई है।
फिलहाल पूरा छत्तीसगढ़ भीषण गर्मी और बदलते मौसम के बीच दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ लू लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही है तो दूसरी तरफ अचानक आने वाली आंधी और बारिश नई चुनौतियां खड़ी कर रही है। अब लोगों की नजरें 29 मई के बाद होने वाले मौसम बदलाव पर टिकी हैं, जिससे राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।