छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में सरकारी धान उपार्जन व्यवस्था में बड़ा घोटाला सामने आया है। पंडरिया और लोहारा विकासखंड में खाद्य विभाग की जांच के दौरान करीब डेढ़ करोड़ रुपए के गबन का खुलासा हुआ है। फर्जी धान खरीदी, रिकॉर्ड में हेराफेरी और सरकारी राशि के बंदरबांट के आरोपों ने प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है।
जानकारी के मुताबिक पंडरिया क्षेत्र की कामठी समिति में जांच के दौरान 3289 क्विंटल धान की फर्जी खरीदी और बिक्री का मामला सामने आया। आरोप है कि रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर सरकारी धन का गबन किया गया। जांच अधिकारियों को दस्तावेजों में कई गंभीर अनियमितताएं मिली हैं, जिसके बाद पूरे मामले की जांच और तेज कर दी गई है।
इसी तरह लोहारा विकासखंड के धरमगढ़ में भी लगभग 1200 क्विंटल धान की हेराफेरी का खुलासा हुआ है। दोनों मामलों को मिलाकर प्रशासन करीब डेढ़ करोड़ रुपए के गबन की आशंका जता रहा है।
खाद्य विभाग की जांच में प्रभारी समिति प्रबंधक दयाराम पुसऊ, ऑपरेटर और अन्य कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि फर्जी खरीदी-बिक्री दिखाकर सरकारी राशि का बंदरबांट किया गया। विभाग ने इसे धान उपार्जन नीति का गंभीर उल्लंघन माना है।
खाद्य अधिकारी चंद्रशेखर देवांगन ने मामले को शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाला षड्यंत्र बताया है। उन्होंने संबंधित समिति प्रबंधकों, ऑपरेटरों और अन्य दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही गबन की गई पूरी राशि की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
घोटाले के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। किसानों के बीच भी इस मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। किसान संगठनों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि धान खरीदी व्यवस्था में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियां किसानों के भरोसे को कमजोर कर रही हैं।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी हमेशा से बड़ा राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा रहा है। ऐसे में कबीरधाम में सामने आए इस घोटाले ने एक बार फिर सरकारी उपार्जन प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।